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एक साल में 15 फीसदी बढ़ा डिजिटल लेनदेन

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जौनपुर। नोटबंदी का फैसला हुए एक साल बीत गए। नोटबंदी के चलते इस एक वर्ष में पंद्रह फीसदी लोग ऑनलाइन लेनदेन करने लगे हैं। हालांकि पूरी तरह से डिजिटल लेनदेन शुरू कराने के हरसंभव प्रयास किए गए थे। बैंकों में नोटबंदी से पहले करीब पांच फीसदी लोग ही ऑनलाइन लेनदेन करते थे लेकिन नोटबंदी के बाद यह संख्या करीब 20 फीसदी हो चुकी है। बैंक के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2015-16 में जिले में 54.5 करोड़ रुपये का डिजिटल लेनदेन किया गया जबकि जबकि 2016-17 में यह आंकड़ा करीब 80 करोड़ हो गया।
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कैश लेस इंडिया के लिए भीम ऐप, पेटीएम, ई-कॉमर्स और ई-वॉलेट को बढ़ावा देने की योजना बनी, लोगों को जागरूक किया गया लेकिन लेनदेन की नई व्यवस्था से अभी उतनी संख्या में लोग खुद को नहीं ढाल पा रहे जितनी उम्मीद की जा रही थी। बेशक मोबाइल बैंकिंग से लेनदेन की तादाद बढ़ी है। नोटबंदी के बाद ऑनलाइन लेनदेन के लिए तमाम कारोबारियों ने स्वाइप मशीनें लगवा लीं लेकिन ग्राहक अभी भी कैश लेनदेन में ही अधिक भरोसा करते हैं। पेट्रोल पंप कारोबारी सिद्धार्थ सिंह कहते हैं कि मुश्किल से दस फीसदी लोग ही डेबिट या क्रेडिट कार्ड से पेट्रोल, डीजल का भुगतान करते हैं। दिन में अगर दो लाख की बिक्री होती है तो 20 हजार रुपये का ही भुगतान डेबिट या क्रेडिट कार्ड से लोग करते हैं। वह कहते हैं कि लोगों को यह डर रहता है कि एटीएम से भुगतान करने में खाते से पैसा कट जाएगा और पर्ची नहीं निकली तो उन्हें देर तक इंतजार करना पड़ सकता है। एलडीएम एके सिंह कहते हैं कि करीब बीस फीसदी ग्राहक ऑनलाइन बैंकों से लेनदेन कर रहे हैं। इसके नाते बैंकों में भीड़ कम हो रही है। उनका कहना है कि नोटबंदी के बाद से बैंकों में खाते बहुत खुले और भीड़ कम हो गई। सिकरारा के चकघसीटा बरईपार में बैंक का वक्रांगी केंद्र चलाने वाले एके पांडेय कहते हैं कि पिछले साल तक उनके सेंटर से पिछले साल तक मुश्किल से एक लाख तक का लेनदेन ऑनलाइन होता था लेकिन अब एक खाते से दूसरे खाते में करीब 4 से पांच लाख रुपये का प्रतिदिन ऑनलाइन आदान प्रदान होता है।
साफ्टवेयर इंजीनियर पंकज मिश्रा ने कहा कि भारत का मौजूदा सूचना प्रौद्योगिकी कानून साइबर क्राइम को रोकने के लिहाज से उतना प्रभावी नहीं है। एटीएम कार्ड की क्लोनिंग बनाने के अलावा बैंक अकाउंट का हैक होने, किसी का डेटा और गोपनीय जानकारी हैकर्स तक पहुंचने की अकसर शिकायतें सुनने को मिलती हैं। ऐसे में जब तक साइबर क्राइम को लेकर सरकार सख्त नहीं होगी, तब तक लोग ऑनलाइन लेनदेन करने से ऐसे ही कतराएंगे।
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इंटरनेट सर्विस के मामले में जौनपुर जिला काफी पिछड़ा हुआ है। बार-बार नेटवर्क कनेक्टिविटी फेल हो जाना या फिर कार्ड इस्तेमाल करने पर सर्वर का ठप हो जाना आम बात है। इससे यूजर को काफी दिक्कत होती है। ऑनलाइन लेनदेन में अपेक्षित बढ़ोतरी न होने का यह भी एक कारण है। डिजिटल लेनदेन के लिए इंटरनेट की सुविधा को बेहतर बनाना होगा।
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