जौनपुर। अगर हिंदुस्तान को विश्व गुरु बनाना है और 125 करोड़ लोगों के अंदर ताकत पैदा करनी है तो शिक्षा पद्धति भारतीय भाषाओं में करनी पड़ेगी। हमारे विश्वविद्यालयों में शिक्षा पद्धति बने जिससे छात्रों के मन में सवाल पैदा हो और उसका जवाब ढूंढने की उनमें ललक पैदा हो। ये बातें हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री ने पूर्वांचल विश्वविद्यालय में आयोजित भारतीय विश्वविद्यालय शिक्षा पद्धति विषयक संगोष्ठी में रविवार को कहीं।
इंजीनियरिंग संस्थान के विश्वेसरैया हाल में रविवार को उच्च शिक्षा पद्धति में बदलाव व उच्च शिक्षा के प्रति पंडित दीनदयाल उपाध्याय का दृष्टिकोण, एकात्म मानववाद और शिक्षा पद्धति विषय पर सत्रों का आयोजन किया गया। इस दौरान संघ प्रचारक रत्नाकर ने कहा कि भारतीय समाज का चिंतन, मूल्य, संस्कृति एवं अवधारणा भारतीय शिक्षा का आधार होगी। कुछ मुट्ठी भर लोगों ने आर्य, अनार्य की गलत व्याख्या कर समाज में गलत संदेश देने की कोशिश की है। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के मदन मोहन हिंदी पत्रकारिता संस्थान के निदेशक प्रो. ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार के लिए नहीं बल्कि आत्मचिंतन, मूल्य एवं आचरण पर आधारित होनी चाहिए। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रो. पीएन सिंह ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में एकात्म मानववाद एक अनुपम प्रयोग है। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ की प्रो. कल्पलता पांडेय ने कहा कि उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के समय शिक्षकों को विद्यार्थियों के पूरे वर्ष की मेहनत को ध्यान में रखना चाहिए। बिना पढ़े मूल्यांकन करना बड़ा अपराध है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के भौतिकी के पूर्व प्रो. राम गोपाल ने कहा कि शिक्षा का निजीकरण हो गया है। अधिकांश महाविद्यालयों में मूलभूत सुविधाएं भी नहीं हैं। कुलपति प्रो. राजाराम यादव ने वक्ताओं को स्मृतिचिह्न देकर सम्मानित किया। संचालन डा. मुराद अली एवं धन्यवाद ज्ञापन संयोजक डा. अविनाश पाथर्डीकर ने किया। इस मौके पर डा. बीडी शर्मा, शतरुद्र प्रताप सिंह, डा. अजय द्विवेदी, डा. राजेश शर्मा, डा. आशुतोष सिंह, डा.एसपी तिवारी, डा. आरएन ओझा, डा. मनोज मिश्रा, डा. दिग्विजय सिंह राठौर आदि मौजूद रहे ।