फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राजस्व न्यायालय में मौखिक बहस का अवसर समाप्त

विज्ञापन
विज्ञापन
घनश्यामपुर। राजस्व न्यायालयों में राजस्व वादों में मौखिक बहस की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। इस संबंध में उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद के आयुक्त एवं सचिव ने सभी मंडलायुक्त और जिलाधिकारियों को पत्र भेजा है। इसमें पत्रावली पर उपलब्ध लिखित वाद, आपत्ति तथा अभिकथन को संज्ञान लेते हुए गुण दोष के आधार पर आदेश पारित करने का निर्देश दिया गया है।
विज्ञापन

राजस्व परिषद के आदेश का कड़ाई से पालन कराने के लिए बदलापुर के एसडीएम डा. केएस पांडेय ने अधीनस्थ न्यायालय तहसीलदार तथा नायब तहसीलदार को पत्र लिखा है। राजस्व परिषद के निर्देश के मुताबिक राजस्व वादों की सुनवाई के समय कतिपय पक्षकारों की ओर से वाद में जान बूझकर विलंब करने के उद्देश्य से कई बार अवसर देने के बाद भी बहस नहीं की जाती है। पीठासीन अधिकारी की ओर से संबंधित पक्ष को मौखिक बहस का अवसर दिए बिना आदेश पारित करने की स्थित में आदेश होने के तत्काल बाद वाद को पुनर्स्थापित करने हेतु प्रार्थना पत्र दिया जाता है। इससे वाद की समूची कार्रवाई नए सिरे से शुरू हो जाती है। इस प्रकार की विलंब करने की प्रवृत्ति के कारण प्रकरण वर्षों तक लंबित पड़ा रहता है और वादकारी न्याय से वंचित रह जाते हैं। राजस्व परिषद ने बताया है कि प्रकरणों में मौखिक बहस के अवसर को समाप्त कर पत्रावली पर उपलब्ध लिखित वाद पत्र, आपत्ति तथा अभिकथन को संज्ञान में लेते हुए गुण दोष के आधार पर आदेश पारित किया जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें