शाहगंज (जौनपुर)। चकबंदी प्रक्रिया में धांधली करने का आरोप एवं गोमती नदी में कटान के कारण 1000 बीघे जमीन से मतरुक किए जाने के विरोध में बीरमपुर के ग्रामीणों ने संतोष मिश्रा के नेतृत्व में चकबंदी कार्यालय शाहगंज पर गुरुवार को प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने पुन: चकबंदी प्रक्रिया शुरू किए जाने की मांग किया।
बीरमपुर के ग्रामीणों ने बताया कि सन 1936 में गोमती नदी में आई भीषण बाढ़ के कारण नदी ने धारा बदलकर बीरमपुर को दो भागों में बांट दिया जिससे 1000 बीघे जमीन से ग्रामीणों को विस्थापित होना पड़ा। बाढ़ समाप्त होने पर जब ग्रामीण अपनी जमीन पर कब्जा करने वापस गए उन जमीनों पर गौरा, गजेंद्रपुर गांव के लोगों ने अवैध कब्जा कर लिया था। वर्ष 1938 में कब्जे के को लेकर हुए खूनी संघर्ष में वीरपुर के नौ लोगों की मौत हो गई थी। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे संतोष मिश्रा ने बताया कि वीरमपुर में 1997 में चकबंदी प्रक्रिया शुरु की गई किंतु व भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई साथ ही नदी के कटान से छूटे जमीन का मूल्यांकन चकबंदी विभाग द्वारा नहीं किया गया। जबकि भू -मैप में 1936 के पूर्व की स्थित दर्शायी जाती है। जमीनों का सही मूल्यांकन ना होने से गांव के बहुत से कास्तकार भूमिहीन हो गए। इसलिए चकबंदी प्रक्रिया पुन: शुरू की जानी आवश्यक है। प्रक्रिया को पुन: शुरु किए जाने के लिए मुख्यमंत्री को प्रार्थना पत्र भी दिया गया है। इसके बावजूद भी चकबंदी अधिकारी हीला हवाली कर रहे हैं।
काश्तकारों के प्रदर्शन के बारे में जब चकबंदी अधिकारी मकसूद आलम नकवी को सूचना हुई तो वह ग्रामीणों को अपने चेंबर में बुलाकर लगभग आधे घंटे तक लोगों से बीरमपुर की समस्याओं के बारे में जाना तथा निष्पक्ष रुप से चकबंदी कराने के लिए उन्होंने ग्रामीणों को आश्वासन दिया। चकबंदी अधिकारी के आश्वासन पर काश्तकारों ने धरना प्रदर्शन को समाप्त किया।
धरना प्रदर्शन में प्रमुख रूप से ग्राम प्रधान राजू यादव, पूर्व प्रधान ठाकुर प्रसाद यादव, कपिल तिवारी, प्रभाकर तिवारी, कमलेश तिवारी ,बबलू मिश्रा, देवी प्रसाद मिश्र, पवन तिवारी, मोहम्मद नजरू, स्वामी प्रसाद मिश्र, ब्रिजकेसर मिश्र, राजाराम श्रीवास्तव सहित भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।