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व्यापारी, उपभोक्ता सभी असमंजस में 17-00-57

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जौनपुर। जीएसटी के मसले पर व्यापारी से लेकर उपभोक्ता तक सभी असमंजस में हैं। पहली जुलाई से समूचा देश भले ही कर प्रणाली की 70 साल पुरानी व्यवस्था से मुक्त होकर जीएसटी युग में प्रवेश कर गया पर शनिवार को बाजार पर इसका कोई खास असर देखने को नहीं मिला। जीएसटी लागू होने के बाद खाने पीने के सामान, दैनिक उपभोग की वस्तुएं, स्वास्थ्य और स्टेशनरी से जुड़ी जिन वस्तुओं की कीमतों में कमी लाने का दावा किया गया है वे सभी वस्तुएं भी पुरानी कीमत पर ही बिकी। व्यापारी, उपभोक्ता सब के सब इस मसले पर चर्चा में मशगूल जरूर दिखे।
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थोक से लेकर फुटकर कारोबारियों का भी कहना है कि अभी तक उनके पास जो माल है उसपर वे पहले से ही वैट कर अदा कर चुके हैं। उसकी कीमत कम कर के बेचना इसलिए संभव नहीं है कि कीमत कम करने से उनकी क्षतिपूर्ति कैसे होगी नई व्यवस्था में इसका कोई समाधान नहीं सुझाया गया है। इसनाते नया माल लाने के बाद ही उसकी बिक्री में नई दर लागू करना संभव हो सकेगा। शनिवार को बाजार में नहाने के साबुन, हेयर आयल, डिटर्जेंट पाउडर, माचिस, मोमबत्ती, खाने पीने की वस्तु पनीर, मिल्क पाउडर, छांछ, दही, सरसों का तेल अचार, मुरब्बा सभी वस्तुएं पुराने दर पर ही बाजार में बिक रही थी। हां कुछ व्यापारियों का यह भी मानना है कि रोज की तुलना में शनिवार को दूकानों पर लोगों की भीड़ कम दिखी। घी, मौदा, तेल चीनी आदि प्रमुख खाद्य सामग्रियों के थोक व्यवसायी किसनलाल हरलालका कहते हैं खाने पीने की वस्तुओं पर पहले भी 5 प्रतिशत वैट देना होता था और अब भी पांच प्रतिशत का टैक्स अदा करना होगा इस नाते इन वस्तुओं के दाम में कोई अंतर नहीं आएगा। मैदा अगर ब्रांडेड है तो प्रतिकुंतल 100 रुपये अधिक देना होगा। उनका कहना है कि जीएसटी से व्यापारियों को कोई परेशानी नहीं है बस तकलीफ यही है कि हर दसवें दिन माल खरीद और बिक्री का ब्योरा आनलाइन देना होगा। पहले यह काम तीन महीने में एक बार करना होता था। कपड़ा व्यवसायी अमित गुप्ता कहते हैं कि थान वाले कपड़ों पर पहले कोई टैक्स नहीं देना होता था लेकिन अब पांच प्रतिशत उसपर भी टैक्स अदा करना होगा।
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