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हड़ताल के समर्थन में कार्यो से बिरत रहे कर्मचारी

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जौनपुर। हड़ताल के दूसरे दिन बुधवार को भी कर्मचारी केंद्र सरकार की जन विरोधी एवं मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ विकास भवन, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई, स्वास्थ्य कर्मचारी संगठन हड़ताल पर रहें। दवा प्रतिनिधियों के संगठन यूपीएसएमआरए ने भी रैलियां निकालकर कर हड़ताल का सहयोग किया। इसके अलावा किसान संगठन, खेत मजदूर यूनियन ने हड़ताल का समर्थन करते हुए दो दिवसीय धरने में अपनी सहभागिता दर्ज कराई।
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केन्द्रीय श्रम संगठनों की ओर से सीटू, एटक, यूटीयूसी की महत्वपूर्ण भूमिका रहीं। वक्ताओं ने न्यूनतम वेतन, पूरानी पेंशन बहाली, संविदा कर्मियों को राज्यकर्मी घोषित करने, श्रम कानूनों को मजदूर विरोधी नहीं बनाने, भष्ट्राचार से मुक्ति दिलाने, महंगाई पर रोक लगाने, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा को सबके लिए मुहैया कराने पर जोर दिया। उन्होंने शपथ लिया कि दो दिवसीय हड़ताल से भी सरकार की श्रम विरोधी नीतियां वापस नहीं ली गई तो आने वाले समय में 100 करोड़ लोगों को आंदोलन में उतारने का कार्य केंद्रीय श्रम संगठन एवं कर्मचारी करेंगे।
इस मौके पर अरविंद यादव, प्रमोद पाठक, किरण शंकर रघुवंशी, वीके शर्मा, शिव कुमार यादव, राजेश रावत, राम गोपाल सिंह, महेंद्र कुमार मौर्य, शशी यादव, किरण पटेल, अच्छेलाल पाल, अजय सिंह, कल्लुराम कामरेड, पारसनाथ यादव, सीबी सिंह, अवनीश शुक्ला आदि मौजूद रहे। संचालन नीरज श्रीवास्तव एवं अध्यक्षता प्रदीप कुमार सिंह बब्बू ने किया।
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आम हड़ताल के समर्थन में केंद्रीय कमेटी के निर्देश पर कार्य बहिष्कार के दूसरे दिन विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति जौनपुर ने कार्य बहिष्कार कर मंडल कार्यालय के समक्ष विरोध प्रर्दशन किया। वक्ताओं ने
बिजली निगमों का एकीकरण कर राज्य विद्युत परिषद लि का पुनर्गठन करने, इलेक्ट्रिसिटी, अमेंडमेंट बिल 2018 वापस लेने, सरकारी क्षेत्र के बिजली उत्पादन गृहों का नवीनीकरण/ उच्चीकरण करने, निजी घरानों से मंहगी बिजली खरीद हेतु सरकारी बिजली घरों को बंद करने की नीति समाप्त करने, बिजली कर्मियों की वेतन विसंगतियों का तत्काल द्विपक्षीय वार्ता द्वारा निराकरण किये जाने, वर्ष 2000 के बाद भर्ती हुए सभी कार्मिकों के लिए पुरानी पेंशन प्रणाली लागू करने, सभी श्रेणी के समस्त रिक्त पदों पर नियमित भर्ती किये जाने, नियमित प्रकृति के कार्यो में संविदा/ ठेकेदारी प्रथा समाप्त कर संविदा कर्मियों को तेलंगाना सरकार के आदेश की तरह नियमित करने की मांग किया। सभा को ई. बलभद्र मिश्रा, ई. एसके सनोरिया, संजय यादव, मोहन पाण्डेय, विजय यादव आदि ने संबोधित किया। अध्यक्षता कमला पाण्डेय, और संचालन निखिलेश सिंह जिला संयोजक ने किया। इस मौके पर अश्वनी श्रीवास्तव, संतोष श्रीवास्तव, विजय चैहान, प्रभात पाण्डेय, निधि श्रीवास्तव, रतन श्रीवास्तव, ब्रिजेश राय, अफजाल अहमद, अरविन्द तिवारी, गिरीश यादव, विनोद, संजय वाल्मिकी, धर्मवीर, विकास, कामता यादव आदि मौजूद रहे।

ऑल इंडिया रीजनल रूलर बैंक इम्प्लाइज एसोसिएशन के आह्वान पर श्रम एवं बैंक विरोधी नीतियों के खिलाफ दो दिवसीय हड़ताल को सफल बनाने के लिए बैंक कर्मियों ने धरना प्रदर्शन किया। हड़ताल की वजह से ग्रामीण बैंक की 108 शाखाएं, यूनियन बैंक की 100 शाखाएं, ओरिएंटल बैंक की छह शाखाएं, इलाहाबाद बैंक की छह शाखाएं, बैंक आफ बड़ौदा की छह शाखाएं, केनरा बैंक की दो शाखाएं, कारपोरेशन बैंक की तीन शाखाएं, देना बैंक की दो शाखाएं, पीएनबी की बारह शाखाएं, यूकों बैंक की दो शाखाएं, इंडियन यूनाईटेड एवं बैंक आफ इंडिया की एक - एक शाखाएं बंद रहीं। इस दौरान 400 करोड़ से अधिक का लेन- देन प्रभावित रहा।
यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन के मंत्री आरपी सिंह ने बैंक कर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ट्रेड यूनियन के अधिकार को निषेध करने जा रहीं है। केंद्र सरकार सभी श्रम कानूनों को खत्म करके, संहिताओं को संसद में पारित करने जा रहीं है। जो श्रम हित में नहीं है। सभा को कृष्णा यादव, दुष्यंत , अश्वनी, रमाशंकर पाल, पन्नालाल सिंह, राजन, सुनील सोनकऊर, श्यामजी, श्रीदेव मौर्य, वीपी श्रीवास्तव, कमलेश मिश्र आदि मौजूद रहें।
उधर काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक अधिकारी व कर्मचारी संगठन ने सात सूत्रीय मांगों को लेकर क्षेत्रीय कार्यालय सिविल लाइन में धरना प्रदर्शन किया। इनके हड़ताल पर रहने की वजह से 108 शाखाएं बंद रही। बैंककर्मियों ने ग्रामीण बैंकों को अन्य बैंकों के समान मजबूती प्रदान करने, नियुक्ति एवं प्रमोशन करने, आदि मांगें की। सभा को एसएन सिंह, शकील अहमद, अश्वनी कुमार श्रीवास्तव, एके शर्मा, श्याम नारायण सिंह, अशफाक अहमद, हरिमंगल मिश्र, अरूण श्रीवास्तव, रत्नाकर दूबे, खुर्शीद अहमद, बालेेंदु भूषण, आरती, सुमति, विकास मिश्र, दीपक प्रशांत आदि ने संबोधित किया। संचालन शकील अहमद और आभार अश्वनी श्रीवास्तव ने व्यक्त किया।

केंद्रीय श्रम संगठनों आह्वान पर श्रम विरोधी नीतियों के विरोध में 10 सूत्रीय मांगों को लेकर कार्य ठपकर प्रधान डाकघर परिसर में भारतीय डाक कर्मचारी संघ के सदस्य धरने पर बैठे। धरने को संबोधित करते हुए राम उजागिर यादव ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार श्रमिक हितों पर कुठाराघात कर रही है। कर्मचारियों द्वारा लगातार धरना प्रदर्शन कर जायज मांगों को मानने के लिए दबाव बनाया गया है। फिर भी सरकार हठ पर अड़ी हुई है। डाक घरों में करोड़ो रूपए के लेन देन के साथ स्पीड पोस्ट, रजिस्ट्री आदि का कार्य प्रभावित रहा। सभा को आरके मिश्र, हरिशंकर यादव, राजेश सिंह, मोहित राम यादव, कन्हैया गुप्ता, ऋषिकेश चौहान, राजनाथ यादव, सचिदानंद मिश्र, सुशील कुमार, श्याम सुंदर, श्रवण कुमार मिश्र आदि ने संबोधित किया। बीएसएनएल कर्मचारी संघ और बीमा कर्मी भी हड़ताल में शामिल रहे। अपने कार्यालयों पर दोनों संगठनों ने धरना देकर श्रम विरोधी नीतियों का विरोध किया। कहा कि भविष्य में आंदोलन और तेज किया जाएगा।
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