जौनपुर। केंद्र सरकार क्षय रोग उन्मूलन के लिए काम कर रही है। रोगियों को खोजकर उनका इलाज किया जा रहा है। इसके बावजूद जिले के
टीबी अस्पताल में डाक्टर, मशीनें और दवाएं होते हुए भी मरीजों को समय से इलाज नहीं मिल पा रहा है। पहले इस अस्पताल में 40 बेड थे लेकिन अब उनकी संख्या महज 10 रह गई है और उस पर मरीज भर्ती नहीं होते हैं।
जिले में टीबी के जिले में टीबी के 4440 रोगी हैं। इनका इलाज डाट्स के जरिए चल रहा है। सामान्य रोगियों का इलाज डाट्स से हो सकता है लेकिन गंभीर रोगियों को भर्ती करना पड़ता है। आमतौर पर ऐसे रोगियों को अन्य अस्पतालों में संक्रमण फैलने की वजह से चिकित्सक भर्ती करने से कतराते हैं। इसको देखते हुए जिले में क्षय रोग के इलाज के लिए 40 बिस्तर के अस्पताल का निर्माण कराया गया था। अस्पताल में बहिरंग विभाग है, वहां मरीज देखे जाते हैं लेकिन रोगियों को भर्ती नहीं किया जाता है। स्वास्थ्य विभाग का निर्देश है कि जो गंभीर मरीज हैं उनको भर्ती करके इलाज किया जाए। मगर यहां गंभीर को भर्ती ही नहीं किया जाता है। स्वास्थ्य महकमे की क्षय रोग के इलाज के प्रति रवैए का पता इसी बात से चलता है कि अब इस अस्पताल में बिस्तरों की संख्या घटाकर 10 कर दी गई है। रविवार की रात में ऐसे ही एक किशोर मरीज की मौत हो गई। टीबी अस्पताल में मरीजों की जांच के लिए दवा और मशीनों के साथ अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं। अस्पताल में तीन चिकित्सकों की तैनाती की गई है। बावजूद इसके मरीजों को सुविधाएं नहीं मिल पा रही है।
11 माह में मिले 4440 टीबी के मरीज
जौनपुर। टीबी के मरीजों को खोजने के लिए घर-घर जाकर मरीज खोजे गए थे। अभियान के तहत अप्रैल 2018 से अब तक कुल 33400 लोगों के बलगम के नमूने लिए गए। जांच कराने के बाद 4440 मरीज पाजीटिव मिले थे। विभाग की ओर चिन्हित किए गए इन मरीजों का इलाज किया जा रहा है। डाट्स के जरिए उन्हें दवाएं दी जा रही हैं।
टीबी मरीजों के लिए जांच की सभी सुविधाएं नि:शुल्क उपलब्ध हैं। हर रोज 50 से अधिक मरीजों की ओपीडी होती है। मरीजों की भर्ती के लिए पहले 40 बेड थे। अब उनकी संख्या घटकर महज दस रह गई है। मरीज भर्ती क्यों नहीं होते यह बताना संभव नहीं है।-डा. एससी वर्मा, एडिशनल सीएमओ एवं प्रभारी