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गुरुपूर्णिमा पर गुरु की पूजा कर लिया आशीर्वाद

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गुरु पूर्णिमा पर गुरु की पूजा कर लिया आशीर्वाद
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कोरोना संक्रमण का भी दिखा असर
फोटो-35-गुरु से आशीर्वाद लेते भक्त।
संवाद न्यूज एजेंसी
उरई/जालौन। गुरु पूर्णिमा पर नगर तथा ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं व पुरुषों ने अपने गुरुओं की पूजा अर्चना कर आशीर्वाद लिया और परिवार की सुख समृद्धि की कामना की। इस दौरान मंदिरों, घरों एवं गुरुजनों के समाधि स्थलों पर सामाजिक दूरी का पालन करते हुए पूजा अर्चना व प्रसाद वितरण हुआ।
आषाढ़ मास पूजा-पाठ का महीना माना जाता है। एक पखवाड़े तक पूजा होने के बाद आषाढ़ी पूर्णिमा (गुरू पूर्णिमा) को पूजा-पाठ का समापन हो जाता है। रविवार को गुरू पूर्णिमा के चलते मंदिरों, घरों एवं गुरुओं के समाधि स्थलों पर पूजा-अर्चना कर अखंड रामायण का पाठ आयोजन किया गया। ठड़ेश्वरी मंदिर में तमाम भक्तों ने जाकर गुरु सिद्धराम का आशीर्वाद लिया। देवी मंदिरों एवं हनुमानजी के मंदिरों के अलावा अखंड परमधाम, गुरु मस्तराम आश्रम में भक्तों ने पहुंचकर श्रृद्धाभाव से मिष्ठान का भोग लगाकर पूजा अर्चना की। इस दौरान नगर व ग्रामीण क्षेत्रों में जगह-जगह धार्मिक आयोजन किए गए। गुरू पूर्णिमा के मौके पर शिष्यों ने अपनी श्रद्धा के अनुसार अपने गुरुदेवों की पूजा, आराधना एवं गुरू के चित्रों पर पुष्पमाला भेंट कर उनका आशीर्वाद लिया। ग्राम बम्होरा में देवी मंदिर पर भक्तों ने पूजा-अर्चना कर गुरु महाराज कुलदीप बाजपेई को माला पहनाकर उनका आशीर्वाद लिया और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। गुरू पूर्णिमा के पर्व पर कोरोना का भी असर दिखा। लोग एक दूसरे से सामाजिक दूरी बनाकर पूजा अर्चना करते दिखे। हवन पूजन के बाद प्रसाद वितरण भी किया गया।
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अन्नपूर्णा मंदिर में चढ़ाया प्रसाद
सिरसाकलार। कालपी मदारीपुर मार्ग पर मलथुआ गांव के पास बने अन्नपूर्णा मंदिर में गुरु पूर्णिमा की शाम को लोग अन्न चढ़ाने आते है। इस बार कोरोना संक्रमण के चलते बारी-बारी से पूजा अर्चना की गई।
गुरुपूर्णिमा पर धार्मिक स्थलों पर पहुंचे लोग
फोटो-31-गुरु का आर्शिवाद लेते भक्त
कालपी। गुरुपूर्णिमा पर्व पर कस्बे व क्षेत्र के धर्मस्थलों में शिष्यों ने अपने गुरु की पूजा अर्चना कर आशीर्वाद लिया। हालांकि सभी मंदिरों में लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते नजर आए।
गुरुपूर्णिमा के मौके पर श्री बिहारी जी मंदिर, वनखंडी देवी, बड़ा स्थान, पथिक जी आश्रम, कालिया स्थान, पातालेश्वर मंदिर आदि स्थानों पर शिष्यों के पहुंचने का सिलसिला सुबह से शुरू हो गया, जो देर शाम तक चलता रहा। श्री बिहारी जी मंदिर के महंत रामदास जी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में ज्ञान प्राप्त करने के लिए गुरु शिष्य की प्राचीन परंपरा है बिना गुरु के ज्ञान प्राप्त करना संभव नही है। गुरु की कृपा से ही शिष्य को समस्त सिद्धियां प्राप्त होती हैं। गुरु अपने शिष्यों के समस्त दोषों को दूर करता है।
सावन का पहला सोमवार आज, तैयारी पूरी
उरई। रविवार को आषाढ़ मास का अंतिम दिन है। सोमवार से सावन मास शरू हो रहा है। सावन की शुरुआत ही सोमवार से हो रही है। ऐसे में सावन के पहले सोमवार को लेकर तैयारियां हो गई है। मंदिरों को भक्तों के लिए तैयार किया जा रहा है। वैसे मंदिर के व्यवस्थापकों का कहना है कि कोरोना संक्रमण के दौर में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराया जाएगा। शासन द्वारा जारी दिशा निर्देशों का अनुपालन कराया जाएगा।
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शहर के ठड़ेश्वरी मंदिर, मौनी बाबा मंदिर, हुल्की माता मंदिर, शीतला मंदिर, काली माता मंदिर आदि में रामेश्वर मंदिर, सिद्ध महाकालेश्वर मंदिर आदि में सावन के पहले सोमवार को लेकर तैयारियां होती रहीं। हुल्की माता मंदिर के व्यवस्थापक राजेंद्र ने बताया कि मंदिर में सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखा जाएगा। एक गेट से भक्तों को अंदर किया जाएगा, जबकि दूसरे गेट से बाहर निकाला जाएगा। दोनों गेटों पर स्टाफ की ड्यूटी लगा दी गई है। प्रसाद आदि चढ़ावे की मनाही रहेगी।
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