जनवरी में मार्च से दिख रहे मौसम ने गुरुवार की शाम अचानक करवट ली। आसमान पर बादल छाने के साथ ही तेज हवाएं शुरू हो गईं। ठंड बढ़ने के कुछ देर बाद ही रिमझिम बारिश शुरू हो गई। कहीं पर पूरी रात रुक-रुक कर बारिश होती रही तो कोंच, कालपी व जालौने में बड़े-बड़े ओले गिरे। यह सिलसिला शुक्रवार की दोपहर तक जारी रहा। बारिश और ओलों से
मटर, मसूर आदि की फसलें बिछ गईं। ऐसे में किसान माथा पकड़कर बैठ गए हैं। हवाओं और बारिश से ठंड के साथ ही जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है। करीब एक सप्ताह से निकल रही तेज धूप से मार्च महीने में पड़ने वाली गर्मी सा एहसास लोगों को होने लगा था। लोगों ने गर्म कपड़े पहनने कम कर दिए थे। बाजारों में भी गर्म कपड़ों की दुकानों
पर सन्नाटा सा छाने लगा था। सभी को लग रहा था कि अब ठंड गई और गर्मी की शुरुआत हो गई। गुरुवार की शाम से ही अचानक मौसम का रुख बदल गया और तेज हवाएं चलने लगीं। कुछ ही देर बाद रिमझिम बारिश शुरू हो गई। देखते ही देखते ओलों के गिरने का भी सिलसिला शुरू हो गई। उरई में तो छोटे-छोटे ओले गिरे, लेकिन कोंच, जालौन, कालपी में तो
सौ सौ ग्राम के ओले गिरे। रिमझिम बारिश के साथ ओले देखकर लोग तो दंग रह ही गए। किसानों के माथे पर भी चिंता की लकीरें उभर आईं। शुक्रवार सुबह किसान खेतों पर दौडे़ तो वहां पर फसल बिछी देख होश फाख्ता हो गए। मटर, मसूर व चना की फसलें भी बारिश से प्रभावित हुईं हैं। गुरुवार की रात हुई बारिश से शुक्रवार की सुबह के वक्त कोहरा छा गया।
दोपहर बाद भी सूरज के दर्शन नहीं हुए और दिन भर ठंडी हवाएं चलीं। मौसम बदलने से शुरू हुई सर्दी से बक्सों में रखे गए गर्म कपड़ों को दोबारा निकाल लिया गया है और ठंडी हवाओं से चलने के लिए लोग गर्म कपड़ों से लदे नजर आए।
इन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा गिरे ओले
कालपी के मुसमरिया, खल्ला, खखारी, सिकरी रहमानियां, अभैदेपुर, पिथऊपुर, जीतामऊ, रायपुर, मानपुर, मडै़या, अकबरपुर और जालौन के छौना, नारायनपुरा, धंतौली, हरकौती, मड़ोरी, भिटारा इत्यादि गांवों में गुरुवार की रात हुई रिमझिम बारिश के साथ सबसे ज्यादा ओले गिरे। इन गांवों में गिरे बडे़-बडे़ ओलों से खासा नुकसान हुआ है।
ओले से खेतों में बिछ गई फसलें
कोंच ब्लाक के पहाड़गांव, नरी, कमतरी इत्यादि गांवों में तो तेज हवाओं के साथ गिरे ओलों की वजह से गेहूं की फसलें बिछ गईं। मटर, मसूर व चना की फसलें भी प्रभावित हुई हैं। किसानों का कहना है कि यदि यही हाल रहा तो पूरी फसल ही चौपट हो जाएगी। पहाड़गांव निवासी मोतीलाल राजपूत, रमाकांत सीरौठिया, हरगोविंद राजपूत, घनश्याम भगत सिंह, भगवती परिहार, बलराम सिंह यादव, दयासागर बुधौलिया का कहना है कि यदि जल्द ही मौसम में सुधार नहीं हुआ तो किसानों को फिर से भारी नुकसान हो सकता है।
जुकाम, खांसी और बुखार के मरीज बढ़े
जिला अस्पताल की ओपीडी में रोज की अपेक्षा शुक्रवार को मरीजों की अधिक भीड़ नजर आई। मरीजों में बच्चों और बुजुर्गों की संख्या अधिक थी। डॉक्टर विनय अग्र्रवाल का कहना है कि रोज की तुलना में 15 से 20 मरीज अधिक आए हैं, और ज्यादातर अचानक हुई सर्दी से प्रभावित थे। लोगों को चाहिए कि वे मौसम की इस आंखमिचौली से पूरी तरह सावधानी बरतें। खानपान के साथ गर्म कपड़े का भी पूरा ध्यान रखे। खासतौर पर हार्ट और ब्लड प्रेशर के मरीजों को तो विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
दलहनी फसल पर बारिश का असर
इन दिनों दलहनी फसलों का महत्वपूर्ण समय चल रहा है, इसमे चना, मसूर, सफेद मटर, सरसों में फूल आ रहा है, लेकिन बारिश ने सबकुछ तहस-नहस कर दिया। तेज बारिश से मसूर, चना, सफेद मटर एवं सरसों के फूल झड़ गये, जिससे फसलों का उत्पादन प्रभावित होने की संभावनाएं बढ़ गयीं हैं।
खेतों में कटा पड़ा अर्किल मटर बीज भी भीगा
इस बार हरी मटर की खेती की स्थिति बेहद खराब रही। हालत यह रही कि नुकसान को लेकर मटर की हरी फली को बेचने की बजाए, कुछ किसान इसका बीज बनाने के लिए फसल की कटाई कर चुके थे, लेकिन अचानक हुई बारिश से खेतों में कटी पड़ी फसल पूरी तरह भीग चुकी है।
बारिश का पानी भरने से फसलें डूबीं
सुबह तड़के हुई झमाझम बारिश से कई खेतों में पानी भर गया। इसमें चना, मसूर, सफेद मटर, सरसों आदि की फसलें पानी में डूबी नजर आईं। जिससे यह फसलें सड़ कर प्रभावित होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं।
- बदली के साथ हवाएं, जारी रहेगी बारिश
मौसम वैज्ञानिक पुरुषोत्तम दास कहते हैं कि मौसम अभी और बदलेगा। बारिश होने की भी संभावना जताई जा रही है। ओले भी गिर सकते हैं। बदली के साथ तेज हवाओं का भी दौर जारी रहेगा। इससे ठंड भी बढ़ेगी।