जालौन। गल्ला मंडी स्थित सरकारी क्रय केंद्रों पर 28 दिनों में 41 हजार क्विंटल गेहूं की खरीद हुई। पिछले दिनों केंद्रों पर बारदाना न होने की वजह से खरीद कम हुई। बुधवार को केंद्रों पर बारदाना पहुंचने के बाद गेहूं खरीद फिर शुरू हो गई।
नगर में गेहूं की खरीद के लिए 11 गेहूं सरकारी क्रय केंद्र बनाए गए हैं। लगभग एक पखवारे तक गल्ला मंडी में नौ ही केंद्र संचालित रहे। इसके बाद सभी 11 गेहूं क्रय केंद्रों पर गेहूं की खरीद शुरू कर दी गई थी। जबकि शुरुआत में तीन दिनों तक केंद्र शुरू नहीं हो सके थे। पहली अप्रैल से संचालित हुए इन क्रय केंद्रों पर अभी तक 41 हजार क्विंटल गेहूं की खरीद हो चुकी है। टोकन होने के बाद भी बारदाना न होने की वजह से किसानों को परेशानी हुई। जब केंद्र शुरू हुए तो बुधवार को मंडी में पिछले टोकन के साथ ही जिन किसानों को 28 अप्रैल की तारीख मिली थी, वे किसान भी मंडी में आ गए। ऐसे में मंडी में अफरातफरी का माहौल रहा।
क्रय केंद्र संचालकों ने पहले पिछले दिनों वाले टोकन लिए किसानों की खरीद की। इसके बाद 28 तारीख को जारी हुए टोकन वाले किसानों की खरीद हुई। ऐसे में बाद वाले किसानों को मंडी में घंटों तक अपना अनाज लेकर खड़ा रहना पड़ा। केंद्र निरीक्षक आशीष कुमार ने बताया कि सभी केंद्रों पर बारदाना उपलब्ध हो चुका है। गेहूं खरीद में अब कोई समस्या नहीं है। किसान अपने टोकन के अनुसार ही क्रय केंद्रों पर अपना गेहूं बेच सकते हैं।
गढग़ुवां सहकारी समिति के केंद्र पर गेहूं बेचने आए किसान राहुल सेंगर ने बताया कि उन्हें 20 तारीख का टोकन मिला था। 20 तारीख को वह अपना गेहूं लेकर केंद्र बेचने के लिए आए थे लेकिन केंद्र प्रभारी ने बताया कि बारदाना न होने से खरीद बंद है। इस कारण उन्हें दो बार भाड़ा देना पड़ा। आज फिर भाड़ा देकर गेहूं लेकर केंद्र पर आए हैं। आज उनका गेंहू खरीदा जा रहा है। कोई समस्या होने पर केंद्र प्रभारियों को किसानों को सूचित करना चाहिए ताकि किसानों को अपना समय और भाड़ा खर्च करने के बाद परेशान न होना पड़े।
किसान सागर सिंह औरेखी ने बताया कि उन्हें 28 तारीख का टोकन मिला था। आज वह केंद्र पर गेहूं लेकर पहुंच गए थे लेकिन सुबह से खड़े होने के बावजूद चार बजे तक उनका नंबर नहीं आया। केंद्र प्रभारी का कहना है कि पहलेे जो किसान छूट गए थे पहले उनका गेंहू खरीदा जा रहा है। इसके बाद उनका नंबर आएगा। मजबूरी में भूखे प्यासे रहकर उन्हें इंतजार करना पड़ रहा है। शायद शाम तक उनका नंबर आ जाए तो वह अपना गेहूं बेच सकेंगे। नहीं तो मजबूरी में उन्हें और परेशान होना पड़ेगा।