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Jalaun News: निचले इलाकों से कम हो रहा पानी, बढ़ा रहा परेशानी, काट रहा संपर्क मार्ग

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उरई। बारिश के पांच दिनों बाद शहर में निचले इलाकों में भरा पानी अब धीरे-धीरे कम होने लगा है, लेकिन दुश्वारियां बरकरार हैं। इस पानी से जयपुरा, जलालपुर, रेवा, दौलतपुरा, रगौली समेत कई छह गांवों के संपर्क कट गए हैं। इससे आवागमन ठप है और शहर में गंदगी फैली हुई है। दवा का छिड़काव न होने से संक्रमण का खतरा बना हुआ है।
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ग्रामीणों विवेक, आकाश, अजीत यादव, संदीप सिंह और डीके ने बताया कि गांवों में चारों ओर पानी भर गया है। 10 से 12 किलोमीटर घूमकर आटा मिल या चिकित्सा के पास पहुंच पा रहे हैं। वहीं, शहर के शांतिनगर, उमरारखेरा, रामकुंड के पीछे, डढ़वा, अथाई और रामनगर जैसे इलाकों में रविवार को हुई 12 घंटे की बारिश के बाद हालात बदतर हो गए थे। 500 घरों में पानी घुस गया था। शांतिनगर की स्थिति सबसे गंभीर थी। यहां एक मंजिला मकान तक पानी में डूब गए थे। राहत शिविर की व्यवस्था मंगलवार रात शुरू की गई, लेकिन वह भी नाकाफी रही।
अमर उजाला ने गुरुवार को समस्या उठाई। इसके बाद सीएमओ डॉ. एनडी शर्मा शिविर में पहुंचे, लेकिन वह उन स्थानों तक नहीं जा सके, जहां करीब 100 पीड़ित परिवार सहायता की प्रतीक्षा में थे। पानी जहां उतर गया है, वहां अब तक कीटनाशक छिड़काव तक नहीं हो सका है। इससे संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है। सभासद जितेंद्र याज्ञिक, अशरफ और शादाब का कहना है कि प्रशासन की ओर से अब तक कोई विशेष अभियान नहीं चलाया गया है। लोग दुर्गंध और मच्छरों से परेशान हैं।
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अधिशासी अभियंता जितेंद्र नाथ ने बताया कि पानी उतर चुके इलाकों की बिजली सप्लाई बहाल करने के निर्देश दोनों जेई को दिए गए हैं। करीब 10 हजार की आबादी पहले संकट में थी, अब बहाल कार्य के बाद स्थिति सामान्य होने लगेगी।


इनसेट

50 मकानों में अभी भी भरा पानी
शांतिनगर, रामनगर, रामकुंड के पीछे, डढ़वा के आसपास अब भी लगभग 50 घरों में पानी भरा हुआ है। इन क्षेत्रों में लोगों को आवाजाही के लिए तीन से चार फीट पानी में चलना पड़ रहा है। अनुमान है कि इन इलाकों से पानी पूरी तरह से निकलने और जगह सूखने में अभी दो से तीन दिन और लगेंगे।


अथायी पुल के पास बने रपटे की हालत जर्जर, हादसे का डर
अथायी पुल के पास बने रपटे (नाला-पुलिया) की हालत बेहद जर्जर है। हादसे का डर बना हुआ है। 40 वर्ष पुराना यह रपटा नीचे की ओर है, जिससे हल्की बारिश में भी यह उफान पर आ जाता है और 20 हजार की आबादी का आवागमन पूरी तरह ठप हो जाता है। सभासद नगमा और पूर्व सभासद हाशिम ने विधायक और नगर परिषद बोर्ड की बैठक में भी यह मुद्दा उठाया था। उन्होंने बताया कि इस बार रपटा करीब सात से आठ दिन से लगातार पानी में डूबा है।
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वर्जन:
जहां पर पानी उतर गया है। वहां अभियान की शुरुआत जल्द कर दी जाएगी। सफाई के लिए अलग से टीम लगाई जाएगी और छिड़काव भी होगा।
— संदीप कुमार, सफाई निरीक्षक, नगर पालिका
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