कालपी। गेहूं की फसल में पानी लगाने का काम चल रहा है और यूरिया की कमी किसानों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। किसानों का कहना है कि सरकारी, निजी किसी केंद्र पर यूरिया खाद नहीं मिल रही। यूरिया खाद विक्रेताओं के गोदाम खाली पड़े हैं।
चार दिनों से सहकारी समितियों के साथ निजी खाद विक्रेताओं के भी गोदाम खाली पड़े हैं। खाद की समस्या किसानों के लिए नई नहीं है। हालांकि यह समस्या डीएपी में ज्यादा थी, जबकि यूरिया के लिए उन्हें ज्यादा परेशान नहीं होना पड़ता था। निजी खाद विक्रेताओं के पर्याप्त स्टॉक रहता है पर इस बार ऐसा नहीं हुआ है। किसानों का कहना है कि इस समय गेहूं की फसल में पानी देने का समय चल रहा है। इसके बाद उसमें खाद की जरूरत होगी। खाद के अभाव के कारण खेतों में समय से खाद का छिड़काव नहीं हो पा रहा है।
किसान राममोहन, आशनरायन, सुधाकर, कमलेश, रामकुमार के मुताबिक विगत तीन दिनों से वह खाद की एक एक बोरी के लिए नगर में भटक रहे हैं। शीघ्र ही उन्हें यूरिया नहीं मिली तो उसका असर फसलों की पैदावार पर असर पड़ेगा।
सहकारी समिति महेवा के सचिव प्रभु ने बताया कि उन्हें एक बार में महज एक ट्रक खाद मिलती है जो किसानों के लिए नकाफी साबित हो रही है। उन्हें चार दिनों से खाद की आपूर्ति नही मिली है। पीसीएफ प्रभारी धनीराम कुशवाहा ने बताया कि चार दिन से उनके गोदाम में यूरिया की एक भी बोरी नहीं है।
सभी सहकारी समितियों में खाद भेजी जा रही है। निजी विक्रेताओं का इफको और कृभको का कोटा खत्म हो चुका है। उन्हें अब निजी कंपनी की आपूर्ति लेनी पड़ेगी।
- गौरव यादव, जिला कृषि अधिकारी