उरई। गांव, कस्बों में सीएचसी, पीएचसी की ओपीडी सेवाएं बंद है। जिन गांवों में संक्रमण अधिक है वहां के अस्पतालों को ही कोविड अस्पताल में तब्दील कर दिया गया है। ऐसे में कोरोना के अलावा सर्दी, खांसी, बुखार, डायरिया, मलेरिया आदि के मरीजों को काफी परेशानी हो रही है। इक्का दुक्का अस्पतालों को छोड़ दें तो अधिकांश मरीजों को वापस लौटाया जा रहा है। ऐसे में ग्रामीणों को भी गांव कस्बों के झोलाछाप का ही सहारा लेना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कोविड गंभीर बीमारी है। पर अन्य बीमारियों के लिए विशेषकर महिलाओं और बच्चों को लेकर शहर भागना संभव नहीं होता है। आसपास ही किसी सरकारी डॉक्टर को बैठा दिया जाए तो राहत मिलेगी। प्रस्तुत है आ रही दिक्कतों पर ग्रामीणों से बातचीत पर आधारित खबर-
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फोटो-16 सीताराम
मंहगा पड़ रहा प्राइवेट इलाज
महेवा के सीताराम ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र में अन्य बीमारियों के इलाज की सुविधा न होने से मजबूरन आसपास के प्राइवेट अस्पतालों में जाना पड़ता है। जहां पर न सिर्फ लंबी लाइनें ही दिखती है बल्कि इलाज भी काफी महंगा होता है।
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फोटो-17 रामलखन
मौसम में बदलाव से भी बीमारी
महेवा के ही रामलखन ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों व अन्य स्टाफ की ड्यूटी मगरौल में लगा दी गई है। बार-बार मौसम में बदलाव होने से छोटी छोटी बीमारियां बढ़ रही है, जिनका इलाज मिलना मुश्किल हो रहा है।
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फोटो-18 प्रेम
मां को शहर लेकर जाना पड़ा
मुहम्मदाबाद गांव के प्रेम अतरौलिया ने बताया कि मां के सिर में कुछ दिनों से दर्द है, गांव के अस्पताल की ओपीडी में इस वक्त इलाज की कोई सुविधा भी नहीं है। लिहाजा उन्हें इलाज के लिए बार बार लेकर शहर ही जाना पड़ता है।
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फोटो-19 अनिकेत
बिना पर्चे के दे रहे दवाएं
कुसमिलिया निवासी अनिकेत ने बताया कि पेट दर्द होने पर डकोर पीएचसी गए। तो वहां से दवा तो दे दी पर कोई पर्चा नहीं दिया। पूछा कि दोबारा दवा कैसे मिलेगी तो जवाब मिला। फिर तो जब डॉक्टर आए तो ही दवा लेना। चुपचाप लौटने के अलावा कुछ नहीं सूझा।
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फोटो-20 गुड्डी
जांच की भी सुविधा बंद हुई
माधौगढ़ के खुदातपुरा गांव निवासी निवासी गुड्डी का कहना है कि अभी तक सरकारी अस्पतालों से न सिर्फ इलाज बल्कि जांच, एक्सरे भी निशुल्क हो जाते थे। कोविड अस्पताल बनने के बाद जांच भी बाहर से करानी पड़ रही है।
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फोटो-21 माता प्रसाद
झोलाछाप से इलाज लेना मजबूरी
माधौगढ़ कस्बे के माता प्रसाद का कहना है कि बदलते मौसम में वायरल तेजी से फैल रहा है। सरकारी अस्पतालों से सारी सेवाएं अन्य मरीजों के लिए बंद है। ऐसे में न चाहते हुए भी हफ्तों तक झोलाछाप डाक्टरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
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फोटो-30 ऊषा सिंह
ओपीडी बंद है पर इलाज नहीं
किसी भी सीएचसी और पीएचसी में आम इलाज बंद नहीं है। यहां तक महिलाओं की डिलेवरी तक के निर्देश दिए गए है। ताकि उन्हें भटकना न पड़े। बावजूद इसके यदि कहीं पर इलाज नहीं मिलता है अथवा दवा का पर्चा नहीं दिया जाता है, इसकी शिकायत आने पर सख्त कार्रवाई होगी। ओपीडी बंद है पर इलाज नहीं।
डाक्टर ऊषा सिंह, सीएमओ