उरई। शहर के रामनगर निवासी फार्मासिस्ट नरेंद्र कुमार का बेटा राहुल भी शनिवार को यूक्रेन से घर लौट आया। जैसे ही राहुल कार से उतरा, तो पिता नरेंद्र ने उसका माथा चूम लिया। राहुल ने पिता नरेंद्र के पैर छुए। जब वह घर के दरवाजे पर पहुंचा तो मां शारदा देवी पूजा की थाली लिए खड़ी थी। राहुल ने मां के भी पैर छुए। मां ने आरती उतारकर राहुल का तिलक किया। राहुल और उसके साथ आए साथियों को लेकर घर के अंदर पहुंची। शारदा देवी ने मां को खूब दुलारा। परिवार के लोगों, रिश्तेदारों व मोहल्ले वालों ने राहुल से यूक्रेन में चल रहे युद्ध के बारे में जानकारी ली।
राहुल ने बताया कि दिल्ली फ्लाइट से आने के बाद उसे घर तक पहुंचाने का इंतजाम सरकार की तरफ से किया गया था। राहुल के साथ गोंडा निवासी सुयश, लखनऊ निवासी अनिकेत, प्रयागराज निवासी सौरभ पांडेय, जौनपुर निवासी प्रदीप कुमार भी थे। इन सभी को सरकार की तरफ से घर पहुंचाने के लिए गाड़ी उपलब्ध कराई गई थी। सभी छात्र घर वापसी पर खुश दिखाई दे रहे थे।
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फोटो-5-राहुल के साथ यूक्रेन से एक ही कार और फ्लाइट से लौटे छात्र।
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लग रहा था कि बस किसी तरह घर पहुंच जाएं
-तिरंगा झंडा लगाने पर नहीं बोल रहे थे सैनिक
- दूतावास की तरफ से मिल रहा था मदद का भरोसा
संवाद न्यूज एजेंसी
उरई। राहुल के साथ कार से उरई पहुंचे प्रयागराज निवासी सौरभ पांडेय ने बताया कि यूक्रेन में एमबीबीएस छह साल का है। उनका पढ़ाई का पांचवां साल है। गोंडा के सुयश और लखनऊ के अनिकेत का एमबीबीएस की पढ़ाई का चौथा साल है। जबकि जौनपुर के प्रदीप का दूसरा साल है।
यह छात्र बताते हैं कि पहले तो उन्हें नहीं लग रहा था कि युद्ध होगा। भारतीय दूतावास से लगातार मैसेज आ रहे थे कि ज्यादा पैनिक होने की जरूरत नहीं है। फिर भी मन में डर लग रहा था। कई छात्रों ने तो अपने घर लौटने की तैयारी भी कर ली थी। जिसे फ्लाइट की जिस तारीख का टिकट मिला, उसने बुक कर लिया। उन्होंने भी 25 तारीख का टिकट बुक किया था, लेकिन 24 को रुस ने हमला बोल दिया और युद्ध शुरू हो गया। फिर तो स्थिति यह हो गई कि पता नहीं कहां बम या मिसाइल गिर जाए। दिन का चैन और रात की नींद गायब हो गई। वहां सर्दी का मौसम था, लेकिन घबराहट इस कदर थी कि नींद ही नहीं आती थी। लगता था कि बस किसी तरह घर पहुंच जाएं। हम लोग लगातार भारतीय दूतावास को कॉल व मैसेज कर रहे थे। वहां से भरोसा दिया गया था कि जल्द मदद मिलेगी।
कहा गया कि तिरंगा झंडा लगाने से रूसी सेना भी कुछ नहीं बोलेगी। इसके बाद तिरंगा झंडा अपनी बसों व कारों में लगाया और बॉर्डर तक आ गए। तीन दिन बाद फ्लाइट मिली। सभी कहते है कि माहौल शांत होने के तीन-चार महीने बाद ही वापसी की सोचेंगे। इन छात्रों ने कहा कि भारत आने पर बहुत खुशी हो रही है। अब यह लग रहा है कि जल्द घर पहुंचकर परिजनों से मिले। उनके भी फोन आ रहे हैं।