जालौन। मई में खैराती पानी न आने से जहां नहरें व रजबहा आदि सूख चुके हैं। वहीं, तालाबों में भी पानी नहीं पहुंचा है। पशु पक्षी भी पानी के लिए परेशान होने लगे हैं। ग्रामीणों ने नहरों में खैराती पानी छोड़े जाने की मांग की है।
पिछले वर्षों में नहरों मे मई में खैराती पानी आ जाता था। जिसके चलते ग्रामीण क्षेत्रों में गांव के लोगों को राहत मिल जाती थी। पर इस बार मई में 2 सप्ताह बीत चुके हैं पर अभी तक नहरों में खैराती पानी नहीं छोड़ा गया है। एक ओर सूरज की तपन दिनों दिन बढ़ती जा रही है। वहीं दूसरी ओर नदी, नाले, माइनर और तो सूख ही चुके हैं। साथ ही तालाबों का पानी भी सूखने की कगार पर है। मनरेगा योजना के तहत खोदे गए तालाब भी सूखे पड़े हैं। यही हाल माइनरों का है। नहरों में पानी न आने की वजह से माइनरें सूखी पड़ी हैं। ऐसे में जानवरों को पीने का पानी नहीं मिल रहा है। बढ़ती गर्मी के चलते ग्रामीण क्षेत्र में पीने के लिए पानी का संकट दिनों दिन गहराता जा रहा है। अगर समय रहते नहरों में पानी न छोड़ा गया तो जंगली जीव जंतु के सामने जीवन का संकट आ जाएगा। ग्रामीणों में खनुवां, धनौरा कलां, कैंथ, गिधौसा, नारायणपुरा, छानी, कुंअरपुरा, औरेखी आदि गांव के मोहन सिंह, राजेंद्र कुमार, दीपू तिवारी, राधेलाल, विजयचंद्र, राधामोहन आदि ने डीएम प्रियंका निरंजन से मांग की है। कहा कि नहरों में जल्द ही खैराती पानी छोड़ा जाए। ताकि गांवों में तालाबों को भरा जा सके और पशु पक्षियों के पीने के लिए पानी उपलब्ध हो सके।