कोंच। सरकार की ओर से किसी भी क्रय केंद्र पर माल बेचने की छूट दिए जाने के बाद से गल्ला मंडी स्थित खरीद केंद्रों पर किसानों की भीड़ बढ़ गई है। जिन क्रय केंद्रों के गोदाम फुल हो गए थे, उनकी उठान होने के बाद खरीद फिर से चालू हो गई है जिसके चलते किसान इन केंद्रों पर भी आ गए हैं। आलम यह है कि एक-एक केंद्र पर 13-13 गेहूं लदी ट्रालियां खड़ी हैं।
गेहूं की मड़ाई के बाद किसानों के सामने अपनी उपज एमएसपी पर बेचने की चिंता है। शुरुआत में टोकन सिस्टम लागू था और किसानों को खरीद केंद्र आवंटित कर दिए गए थे। जिसके चलते किसान अपना गेहूं बेचने के लिए परेशान थे क्योंकि एक दिन में सीमित किसानों का ही नंबर लग पा रहा था। और उन्हें अपनी बारी के लिए हफ्ते से लेकर पखवाड़े तक का इंतजार करना पड़ रहा था। पर जब सरकार ने उन्हें किसी भी केंद्र पर अपना गेहूं बेचने की छूट दे दी तो वह खरीद केंद्रों की ओर उमड़ पड़े। अब उनका टोकन उसी केंद्र को निकालना होगा। क्रय केंद्रों पर सैकड़ों की संख्या में ट्रालियां खड़ी हैं जिनके ऊपर तिरपाल हैं। किसानों ने बताया कि हर घड़ी बूंदाबांदी हो रही है और अभी यह भी तय नहीं है कि उनका नंबर कब आएगा। सो पानी से बचाव का इंतजाम तो करना ही होगा।
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फोटो8-ई-पॉश मशीन में अंगूठा लगाता किसान। संवाद
खरीद केंद्रों पर किसानों की बढ़ी परेशानी
कोंच। शासन द्वारा गेहूं की सरकारी खरीद में ई-पॉश व्यवस्था लागू कर देने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। जिन किसानों द्वारा खरीद केंद्रों पर अपना पंजीकरण कराया गया है, उन्हें अपने परिजनों को भेजने के बजाय अब स्वयं ही खरीद केंद्रों पर आना पड़ रहा है। गेहूं की तुलाई पूरी होने के बाद संबंधित किसान का अंगूठा ई-पॉश मशीन में दर्ज कराना होगा। तभी आगे की कार्रवाई हो सकेगी। कोंच गल्ला मंडी परिसर में संचालित विपणन खरीद केंद्र प्रभारी राजीव सिंह ने बताया कि जो किसान खरीद केंद्रों पर स्वयं आने में असमर्थ हैं। अब ऐसे किसान ऑनलाइन पंजीकरण कराते समय नॉमिनी के रूप में अपने किसी भी परिजन का नाम दर्ज करा सकते हैं। उस नॉमिनी का ई-पॉश मशीन में अंगूठा दर्ज हो सकेगा। सोमवार से उक्त व्यवस्था लागू होने से ट्रैक्टर-ट्रॉली में गेहूं लादकर खरीद केंद्रों में पहुंचने वाले किसान परेशान हो रहे हैं। जिन किसानों के पंजीकरण थे उनके स्थान पर उनके परिजन आए थे उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ा। उन्हें पंजीकृत किसानों को स्वयं खरीद केंद्रों पर बुलाना पड़ा तब कहीं जाकर उन किसानों के गेहूं की तौलाई हो सकी।