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शादी की रस्में नहीं हुई, गांव में मातम

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मुहम्मदाबाद। डकोर थाना क्षेत्र के ग्राम ऐर से शनिवार को देवास मध्यप्रदेश जा रही कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी, जिसमें उरई का चालक और ऐर गांव के तीन युवकों की मौत हो गई। इस घटना के बाद से पूरे गांव में मातम है। दूल्हे के घायल पिता अमर सिंह व रिश्तेदार महेश का इंदौर में इलाज चल रहा है। हादसे के कारण शादी की रस्में भी नहीं हुई। सोमवार की भोर में तीनों शव गांव पहुंचे तो वहां चीख पुकार मच गई।
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बता दें कि डकोर थाना क्षेत्र के ऐर गांव निवासी सोहित यादव की बरात 8 मई को देवास मध्यप्रदेश जा रही थी। इंदौर से कुछ पहले ही बरात में शामिल कार मक्सी गांव के पास खंदक में जा गिरी। हादसे में कार सवार सोहित के चाचा सुरेश, पड़ोसी पुष्पेंद्र, साकिर व कार चालक सुशील नगर निवासी मनोज कुमार की मौत हो गई थी। जबकि सोहित के पिता अमर सिंह और गांव निवासी महेंद्र गंभीर रुप से घायल हो गए थे। जिनका इलाज इंदौर के अस्पताल में चल रहा है। दूल्हे सोहित को जैसे ही हादसे की जानकारी हुई वह बरात छोड़कर सीधे अस्पताल पहुंच गया। जिसके चलते शादी की रस्में भी नहीं हो सकी। उधर, सोमवार की सुबह सुरेश, पुष्पेंद्र और साकिर के शव ऐर गांव पहुंचे तो चीख पुकार मच गई। परिजनों ने सुबह जल्दी ही तीनों के शवों का अंतिम संस्कार करा दिया। कहीं चिताए जलने तो कहीं कब्र खुदने से पूरे गांव का माहौल गमगीन रहा। परिजनों ने बताया कि जो कार हादसे का शिकार हुई है, उसी में बहू के जेवर लेकर अमर सिंह ही बैठे थे। फिलहाल जेवरों का कुछ पता नहीं चल सका है।
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-परिवार में अकेला कमाने वाला था साकिर
कार हादसे में जान गंवाने वाला साकिर अपने घर में अकेला कमाने वाला था। वह कपड़े की फेरी लगाकर परिवार चला रहा था। घर में पत्नी शबनम के अलावा बेटी रोजी, सुहाना बेटा रिहान, अरहान भी हैं। पत्नी शबनम ने रोते हुए कहा कि कोरोना की वजह से बारात के लिए मना किया था। सुबह आने की कहकर चले गए थे। अब घर का क्या होगा कहकर वह बार बार बेहोश हो रही थी।
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शादी के साथ मौतें भी टल जाती
सोहित की शादी पहले 26 अप्रैल को तय की गई थी पर मध्यप्रदेश में लाकडाउन के कारण तिथि आगे बढ़ाकर 8 मई कर दी गई। इस बार भी लॉकडाउन के कारण परिवार के कुछ लोग तारीख आगे करने की बात कर रहे थे, आखिर में 8 मई को ही बरात निकाली गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बरात की तारीख कुछ बढ़ जाती तो शायद इन चारों की मौत भी टल सकती थी लेकिन होनी को कौन टाल सकता है।
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