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Jalaun News: बेटे के हाथों पिता की हत्या से सन्न रह गया उदोतपुरा गांव

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फोटो - 20 मृतक मानवेंद्र सिंह का उदोतपुरा स्थित पैतृक गांव। संवाद
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जालौन। लखनऊ में हुई एक हृदयविदारक घटना ने कोतवाली क्षेत्र के ग्राम उदोतपुरा को गहरे शोक में डुबो दिया है। राजधानी के आशियाना क्षेत्र के सेक्टर एल-91 में रहने वाले शराब कारोबारी मानवेंद्र सिंह की चार दिन पूर्व उनके ही बेटे अक्षत प्रताप सिंह ने गोली मारकर हत्या कर दी। घटना की सूचना मिलते ही पैतृक गांव में स्तब्धता और मातम का माहौल छा गया।
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मूल रूप से उदोतपुरा निवासी मानवेंद्र सिंह करीब 25 वर्ष पूर्व पढ़ाई के सिलसिले में लखनऊ चले गए थे। उनके पिता सुरेंद्र पाल सिंह राजावत उत्तर प्रदेश पुलिस में दरोगा पद से सेवानिवृत्त हैं। पढ़ाई पूरी करने के बाद मानवेंद्र ने लखनऊ को ही स्थायी ठिकाना बना लिया। वहीं उनका विवाह हुआ और उन्होंने पैथोलॉजी के क्षेत्र में काम शुरू किया। जानकारी के अनुसार राजधानी में उनके लगभग एक दर्जन पैथोलॉजी सेंटर संचालित थे। बाद में वह शराब के कारोबार से भी जुड़ गए थे।

करीब पांच वर्ष पूर्व उनकी पत्नी का निधन हो गया था। परिवार में बेटा अक्षत प्रताप सिंह और एक बेटी उनके साथ रहते थे। ग्रामीणों के अनुसार मानवेंद्र का गांव आना-जाना बेहद कम हो गया था। लगभग दो वर्ष पहले वह एक पारिवारिक कार्यक्रम में गांव आए थे। गांव में उनका बचपन बीता था। लोग उन्हें मिलनसार और हंसमुख स्वभाव का बताते हैं। जब भी आते, सभी से आत्मीयता से मिलते-जुलते थे।
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ग्रामीणों ने बताया कि अक्षत प्रताप सिंह का गांव में आना बहुत कम हुआ। चार-पांच वर्ष पूर्व वह कुछ समय के लिए गांव आया था। उस समय उसकी उम्र कम थी और वह पढ़ाई में मेधावी प्रतीत होता था। गांव के बच्चों के साथ खेलते-कूदते उसे देखा गया था।

नौ फरवरी को सुरेंद्र पाल सिंह राजावत द्वारा गांव में भागवत कथा का आयोजन कराया गया था। इस कार्यक्रम में न तो मानवेंद्र सिंह शामिल हुए थे और न ही उनका बेटा आया था। हालांकि परिवार के छोटे बेटे अरविंद, जो पुलिस विभाग में कार्यरत हैं, कथा में शामिल होने गांव पहुंचे थे।

ग्रामीणों के मुताबिक, पिता मानवेंद्र सिंह बेटे अक्षत पर नीट की तैयारी को लेकर दबाव बना रहे थे, जबकि अक्षत की रुचि उसमें नहीं थी। इसी बात को लेकर दोनों के बीच तनाव चल रहा था। आशंका जताई जा रही है कि इसी तनाव ने इस भयावह घटना का रूप ले लिया।

इस वारदात ने गांव के लोगों को भीतर तक झकझोर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस बेटे के उज्ज्वल भविष्य के लिए पिता ने संघर्ष किया, उसी के हाथों इस तरह की घटना हो जाना अत्यंत पीड़ादायक है। गांव में हर जुबान पर एक ही सवाल है - आखिर पिता-पुत्र के रिश्ते में ऐसी कौन सी दरार पड़ गई, जिसने पूरे परिवार को उजाड़ दिया।
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