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आरक्षित टिकट की कालाबाजारी में दो सगे भाई जेल भेजे गए

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उरई स्टेशन पर आरपीएफ की गर रफ्त में आरोपी विनोद व शिवम् - फोटो : ORAI
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उरई (जालौन)। आरक्षित टिकटों की कालाबाजारी में लगे दो सगे भाइयों को आरपीएफ क्राइम ब्रांच की टीम ने पकड़ लिया। उनके पास से पुराने 21 ई-टिकट तथा अग्रिम तारीखों के दो ई-टिकट मिले। आरपीएफ ने उनके तीन लैपटॉप भी जब्त कर लिए हैं और दोनों भाइयों को जेल भेज दिया है।
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बता दें कि शहर के माहिल तालाब के पास स्थित नीलम लॉज में लंबे अरसे से आईआरसीटीसी की आईडी से फर्जी एकाउंट बनाकर आरक्षित टिकटों की कालाबाजारी करने की सूचना पर ग्वालियर के आरपीएफ के डिटेक्टिव विंग के प्रभारी निरीक्षक अवधेश गोस्वामी ने रविवार देर शाम आरपीएफ उरई इंस्पेक्टर राजीव उपाध्याय के साथ छापा मारा। उन्होंने इ-टिकट बनाने वाले शहर के मोहल्ला पटेलनगर निवासी विनोद कौशल (44) और उसके छोटे भाई शिवम (30) पुत्रगण कालीचरण कौशल को पकड़ लिया।
उनके पास से तीन लैपटॉप, दो मोबाइल और प्रिंटर कब्जे में लिए गए। जबकि विगत तारीखों की 21 ई टिकट और अग्रिम तारीख की दो टिकट बरामद किए। जिनकी कीमत 41,358 रुपये है। आरपीएफ इंस्पेक्टर ने बताया कि दोनों भाइयों के खिलाफ रेलवे एक्ट में मामला दर्ज कराकर झांसी में मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। जहां से सोमवार को उन्हें जेल भेज दिया गया। आरोपियों के जेल जाने के बाद टिकट के लिए एडवांस देने वाले यात्री दुकान पर चक्कर काटते नजर आए।
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92 फर्जी आईडी बनाई थी
जांच के दौरान पता चला कि आरोपी दोनों भाई आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर अलग अलग 92 पर्सनल यूजर आईडी बनाकर अवैध-ई टिकट बेचने का कारोबार करते थे। यह कारोबार लंबे अरसे से चल रहा था। आरोपी टिकट बनाने के बाद वेबसाइट से डाटा भी डिलीट कर देते थे पर आईआरसीटीसी की वेबसाइट के मास्टर कंप्यूटर से डाटा नहीं हटता था।
पांच सौ से लेकर हजार रुपये तक की होती थी वसूली
आरोपी दोनों भाई इस धंधे में इस कदर लिप्त हो गए थे कि दोपहर बारह बजे से रात दस बजे तक बुकिंग करते थे। इसमें स्लीपर में प्रति व्यक्ति पांच सौ रुपये तथा वातानुकूलित क्लास के लिए एक हजार रुपये प्रति व्यक्ति की किराये के अतिरिक्त वसूली करते थे। इसके बाद घर में लगे कंप्यूटर से टिकट बनाते थे और दुकान पर आकर टिकटों की डिलेवरी करते थे।
2016 में भी पकड़ा गया था शिवम
आरोपी दोनों भाई लंबे समय से इस कारोबार में लिप्त है। इस मामले में वर्ष 2016 में भी आरपीएफ ने छापा मारकर शिवम को पकड़ा था। जबकि विनोद उस समय आरपीएफ के हत्थे नहीं चढ़ा था। तब शिवम ने इस धंधे से दूर रहने की बात कही थी, पर जमानत पर आने के बाद फिर से काम शुरू कर दिया था। फिर दुकान से हटकर घर पर काम शुरू कर दिया था।
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