- क्लस्टर बनाकर किसानों को जोड़ने की तैयारी, 3400 हेक्टेयर में सूक्ष्म सिंचाई और 861 खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों का लक्ष्य
संवाद न्यूज एजेंसी
उरई। जिले में अब पारंपरिक फसलों के साथ खजूर, ड्रैगन फ्रूट और अंजीर जैसी अपरंपरागत बागवानी फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा। बाजार में मांग और स्थानीय जलवायु के अनुकूल फसलों का चयन कर किसानों को क्लस्टर के रूप में जोड़ने की योजना बनाई जा रही है।
बृहस्पतिवार को कलक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी समीर की अध्यक्षता में हुई जिला औद्यानिक मिशन समिति, जनपद स्तरीय क्रियान्वयन समिति और प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना समिति की बैठक में लिया गया। बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए औद्यानिक योजनाओं के भौतिक और वित्तीय लक्ष्यों को मंजूरी दी गई।
जिला उद्यान अधिकारी ने बताया कि जिले में स्ट्रॉबेरी, ड्रैगन फ्रूट, खजूर, नींबू-मुसम्मी, अनार, पपीता, आंवला और कटहल जैसी फसलों के अलावा शाकभाजी, प्याज, लहसुन, मसाला फसलों, मशरूम उत्पादन और मधुमक्खी पालन को बढ़ावा दिया जाएगा। किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र, स्प्रेयर, मचान और मल्चिंग जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। डीएम ने खजूर, ड्रैगन फ्रूट और अंजीर के साथ अदरक, हल्दी, शिमला मिर्च, बैंगन और टमाटर जैसी फसलों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजनाओं को क्लस्टर के रूप में संचालित किया जाए, ताकि एक क्षेत्र में अधिक किसानों को जोड़कर उत्पादन और विपणन की बेहतर व्यवस्था की जा सके।
50 हेक्टेयर का लक्ष्य, 3400 हेक्टेयर में सिंचाई
बैठक में बुंदेलखंड एवं विंध्य क्षेत्र में औद्यानिक विकास योजना के तहत 50 हेक्टेयर, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के पर ड्रॉप मोर क्रॉप कार्यक्रम के तहत 3400 हेक्टेयर तथा प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना के तहत 861 इकाइयां स्थापित करने के लक्ष्य पर चर्चा हुई। खाद्य प्रसंस्करण योजना में पात्र इकाइयों को अधिकतम 10 लाख रुपये तक की 35 प्रतिशत अनुदान सहायता का प्रावधान है।