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सिर्फ संकल्प नहीं पर्यावरण संरक्षण करके भी दिखाया

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अर्चना माहेश्वरी स्कूल में पौधरोपण करती डीएम व अन्य। - फोटो : ORAI
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उरई। विश्व पर्यावरण दिवस शनिवार को मनाया जाएगा। लोग पौधे रोपने की शपथ लेंगे और उन्हें संरक्षित करने का संकल्प भी उठाएंगे। पर ऐसे कितने लोग हैं जो शपथ और संकल्प को जीवन का हिस्सा मानते हुए अपना तन, मन और धन पर्यावरण संरक्षण को समर्पित कर रहे हैं। विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर ऐसे ही कुछ जुनूनी लोगों को सामने लाने का प्रयास उक्त रिपोर्ट के माध्यम से किया जा रहा है, जिनके जीवन में पर्यावरण से बढ़कर कुछ भी नहीं है। इन पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि आज इस महामारी के दौर ने हर एक को पर्यावरण का महत्व अच्छी तरह समझा दिया है। यदि पेड़, पौधों की कमी न होती तो कोरोना से जूझते लोगों को आक्सीजन के लिए भटकना भी न पड़ता। प्रस्तुत है रिपोर्ट-
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पौधों से तैयार सैनिटाइजर जरूरतमंदों को निशुल्क बांट रहे--
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फोटो-01 फलदार पौधों के बीच पर्यावरण प्रेमी माता प्रसाद। संवाद
बीहड़ में तीन लाख पौधे रोप चुके माता प्रसाद
-बीहड़ में 3 लाख 95 हजार पौधे लगा चुके हैं
संवाद न्यूज एजेंसी
माधौगढ़। पर्यावरण संरक्षण के जज्बे, कड़ी मेहनत के चलते मींगनी गांव निवासी माता प्रसाद तिवारी ने सूखे व बदहाल बीहड़ में साढ़े तीन लाख से अधिक पौधे रोपकर उसे हरा भरा कर दिया। यही नहीं हरियाली महिला संगठन बनाकर पर्यावरण संरक्षण की मुहिम भी शुरू की है। संगठन की ओर से रोपित गए औषधि पेड़ पौधों से सैनिटाइजर बना रहे हैं। ताकि गरीबों को निशुल्क वितरित कर सके।
माधौगढ़ क्षेत्र के धुर बीहड़ गांव निवासी इंटर पास माता प्रसाद तिवारी ने सन 1992 में बीहड़ को हरा भरा करने के लिए नाला के पास फलदार, छायादार पौधे रौपे। पौधों को पानी के लिए मशक्कत कर कुआं भी स्वयं ही खुदवाया। बकौल माताप्रसाद बिना किसी के मदद से पौधौ को निरंतर लगाते रहे। वर्तमान में 3 लाख 95 हजार पौधे बीहड़ क्षेत्र में लगा चुके हैं। इसमें आंवला, नीम, आम, अमरूद, नीबू, कटहल अनार, सरीफा, करौंदा, पपीता, चीकू, सागौन, यूकेलिप्टस, नीम, पीपल, बरगद, के साथ साथ औषधि खेती जिसमें लटजीरा, पथरचटा, तुलसी, सफेद मूसली, ग्लोब, निरगुड़ी, अश्वगंधा, हल्दी आदि के गुणकारी पौधे रोपते हैं। वर्तमान समय में जब देश कोरोना महामारी से जूझ रहा है ऐसे में नीम, तुलसी, नीबू, कपूर, ग्लोब, फिटकरी आदि के पौधों की मदद से तैयार किया जाने वाला सैनिटाइजर वाकई ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। माता प्रसाद की ओर से उक्त सैनिटाइजर निशुल्क वितरित किया जा रहा है।
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फोटो-02 अमित द्विवेदी
फोटो-03 आटा के इटौरा गांव में लगे बर्ड हाउस। संवाद
पक्षियों से प्यार, पौधों से दुलार ने बनाया पर्यावरण प्रहरी
निशुल्क बांट रहे पौधे और बर्ड हाउस, तालाब खुदवाकर किया जल संरक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
उरई। प्रकृति ही परमात्मा है की अवधारणा को आत्मसात करते हुए जैव विविधता के विभिन्न स्वरूपों को संरक्षित, पोषित कर अमित द्विवेदी की पहचान पर्यावरण प्रहरी के रूप में बन चुकी है। उनके पौध रोपण और जल संरक्षण के कार्यों ने आज सैकड़ों लोगों को प्रकृति संरक्षण के अभियान से जोड़ा है ।
पंचायत व पर्यावरण पर कार्य करने वाले अमित अब तक 6 राष्ट्रीय और दो अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार हासिल कर चुके है। अमित कहते है कि बिना प्रकृति के जीवन संभव नही। अमित ने अपने गांव अकबरपुर इटौरा में ही सैकड़ों की संख्या में पीपल के वृक्ष लगाए, जो अब बड़े भी हो गए हैं। साथ ही आम, अमरूद, जामुन आदि का 300 वृक्षों का बाग भी लगाया है। अब तक करीब 3 लाख से ज्यादा पौधों का नि:शुल्क वितरण कर चुके है ।अपने गांव में ही अमित ने जल संरक्षण के लिए तीन बड़े तालाब और दो चेक डैम सहेजने के साथ ही प्राकृतिक जल स्रोतों को बचाने के भी प्रयास किए हैं। गौरैया संरक्षण हेतु भी वह सैकड़ों की संख्या में बर्ड हाउस लगा चुके और और लोगों को निशुल्क वितरित करते रहते है। अब प्रकृति संरक्षण के उनके इस अभियान से बहुत से लोग जुड़ चुके हैं।
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फोटो-04 आटा स्थित मंदिर परिसर में लगे पौधे। संवाद
फोटो- 05- सत्य नारायण।
पार्क, मंदिर, वाटिका को किया हरा भरा
आटा। आटा गांव के पूर्व प्रधान रहे सत्यनारायण वर्मा गांव में करीब दो हजार से अधिक छायादार, फलदार पौधे रोपित किए हैं। उनका कहना है कि कोरोना काल ने लोगों को वृक्षों का महत्व बहुत ही अच्छे तरीके से समझाया है। लिहाजा उनके साथ काफी लोग जुड़ रहे हैं और जल्द ही वे वृक्षारोपण को लेकर एक वृहद अभियान भी चलाएंगे। लाला हरदौल वाटिका, आंगनबाड़ी केंद्र परिसर, प्रधान पार्क, बड़ी माता मंदिर आदि स्थानों पर लगे उनके वृक्षों व पौधों की देखभाल सत्य नारायण स्वयं करते हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल में कस्बे में दो हजार पौधे रोपित करने के साथ साथ लोगों को भी हजारों पौधे निशुल्क वितरित किए हैं। बताया कि लाला हरदौल वाटिका में छायादार, फलदार करीब पंद्रह सौ पौधे लगा चुके हैं। जल्द ही वे हर एक व्यक्ति को कम से कम एक एक पौधा लगाने के लिए प्रेरित करेंगे। (संवाद)
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पढ़े लिखे लोगों को बता रही पर्यावरण का महत्व
उरई। शहर के मोहल्ला नया पटेलनगर निवासी सोनाली शर्मा ने इस साल तीन सौ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। उनका कहना है कि ऑक्सीजन की समस्या से सभी जूझे। पर्यावरण संरक्षण के लिए वह टीम के साथ लोगों को जागरूक कर रही है। साथ ही जन्मदिन या अन्य किसी खास उत्सव पर पौधरोपण करती है और दूसरों को भी प्रेरित करती हैं।
सोनाली शर्मा डीवी कालेज में राजनीति विज्ञान विषय से परास्नातक कर रही हैं। उन्होंने करीब 15 साथियों का एक ग्रुप बनाया है। जो समय समय पर जरूरतमंदों की मदद करता है। लॉक़डाउन में भी ग्रुप के लोगों ने राहत सामग्री पहुंचाने का काम किया था। उनका कहना है कि जिस तरह कथित विकास के नाम पर पेड़ पौधों की कटान हो रही है। वह पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा है। इसके लिए जरूरी है कि जितने पेड़ काटे जाए, उससे ज्यादा लगाने की व्यवस्था की जाए। (संवाद)
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फोटो-14-अर्चना माहेश्वरी स्कूल में पौधरोपण करती डीएम व अन्य। संवाद
हर साल एक पौधा लगाने का संकल्प लिया
उरई। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल की जिला इकाई की ओर से आयोजित शहीद व्यापारियों की याद में विश्व पर्यावरण दिवस के पूर्व संध्या पर पौधरोपण कार्यक्रम अर्चना महेश्वरी इंटर कॉलेज में हुआ। इसमें डीएम प्रियंका निरंजन, एसपी यशवीर सिंह, पालिकाध्यक्ष अनिल बहुगुणा, प्रदेश महामंत्री डॉ दिलीप सेठ ने पौधरोपण किया। डीएम ने कहा कि पेड़ ही जीवन है हम सभी को साल में कम से कम एक एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए। कोरोना काल मे ऑक्सीजन की कमी से काफी लोग आहत हुए है। इसलिए सभी का नैतिक कर्तव्य है कि पेड़ अवश्य लगाए, यही सच्चा पर्यावरण दिवस है। इस मौके पर संतोष गुप्ता, हरिओम बाजपेई, महेश अरोरा, मनीष शंकर अग्रवाल, सुमन शर्मा आदि रहे। (संवाद)
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फोटो-19 घर की छत पर लगे पौधों की देखभाल करती कल्पना। संवाद
छत और खेत पर बना डाली बगिया
उरई। कदौरा ब्लाक के ग्राम पिपरायां निवासी कल्पना भारती के पौधों के प्रेम का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपनी छत को ही अपनी बगिया बना रखी है। जहां पर कई तरह के फूलों और पत्तियों के पौधे लगे हैं। इसके अलावा उन्होंने अपने खेतों में भी पौधरोपण कर रखा है। जिसमें फूल ही नहीं फल और सब्जियां भी उगा रही है। करेला, तुरई आम, महुआ, इमली, पाम, गुलाब, बादाम, पारस पीपल के पौधे लगे हैं। इसमें कई तो अब वृक्ष में तब्दील हो चुके हैं। उनका कहना है कि कई पेड़ ऑक्सीजन के स्रोत हैं, अगर इंसान पेड़ों का संरक्षण करे तो वे पर्यावरण के साथी जरूर बन जाते हैं। वे न सिर्फ अपने पौधों की देखभाल करती हैं बल्कि दूसरों को भी प्रेरित करती हैं कि अधिक से अधिक पौधरोपण करें। (संवाद)
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फोटो-21- विकास भवन में बैठक करती जिलाधिकारी। संवाद
विभागवार पौध रोपण का लक्ष्य निधारित
संवाद न्यूज एजेंसी
उरई। डीएम प्रियंका निरंजन की अध्यक्षता में जिला पौध रोपण समिति की बैठक विकास भवन सभागार में हुई। इसमें वर्ष 2021-22 पौधरोपण हेतु विभाग वार पौध रोपड़ का लक्ष्य निर्धारित किया गया।
प्रभागीय वनाधिकारी अंकेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष में वन विभाग के अंतर्गत 2048436 तथा अन्य विभागों को 3384542 पौधरोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिसमें पर्यावरण विभाग को 227604, ग्राम्य विकास विभाग को 1952880, राजस्व को 222360, पंचायती राज विभाग को 222360, आवास विकास विभाग को 13440, औद्योगिक विकास को 9240, नगर विकास को 38160, लोक निर्माण विभाग को 21840, सिंचाई विभाग को 21840, रेशम विभाग को 35649, कृषि विभाग को 374868, पशुपालन विभाग को 15720, सहकारिता विभाग को 8880, उद्योग विभाग को 16080, विद्युत विभाग को 12600, माध्यमिक शिक्षा को 4452, बेसिक शिक्षा को 4452, प्राविधिक शिक्षा को 10320, उच्च शिक्षा को 39240, श्रम विभाग को 5400, स्वास्थ्य विभाग को 23880, परिवहन विभाग को 5400, रेलवे विभाग को 49920, रक्षा विभाग को 15720, उद्यान विभाग को 246401 एवं पुलिस विभाग को 13440 पौध रोपण किया जाना हैं। डीएम ने निर्देश दिए कि जिन विभागों को जो लक्ष्य निर्धारित किया गया है वह शतप्रतिशत उसे पूरा करे। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी डा. अभय कुमार श्रीवास्तव, नगर मजिस्ट्रेट जिला सूचना अधिकारी सुनील कुमार शुक्ला आदि मौजूद रहे।
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खरीद की समीक्षा, दिए निर्देश
जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने देर शाम आवास पर जिले में गेहूं खरीद को लेकर अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। इस दौरान उन्होंने खरीद की स्थिति को लेकर अधिकारियों से सवाल जवाब किए।
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