उरई। जिला अस्पताल से चार साल पहले स्थानांतरित हो चुके एक लिपिक ने आज तक अस्पताल परिसर स्थित सरकारी आवास खाली नहीं किया है। हैरानी की बात यह है कि कई बार नोटिस और रिमाइंडर भेजे जाने के बावजूद न तो आवास खाली कराया गया और न ही कोई प्रभावी कार्रवाई हुई।
जिला अस्पताल में लिपिक पद पर तैनात रहे एक कर्मचारी का स्थानांतरण दो जुलाई 2022 को कानपुर देहात कर दिया गया था। स्थानांतरण के बाद उन्होंने कार्यालय का कार्यभार तो छोड़ दिया, लेकिन अस्पताल परिसर स्थित सरकारी आवास पर कब्जा बरकरार रखा। वह आवास का उपयोग अब भी कर रहे हैं और वहां अपने वाहन भी खड़े करते हैं।
बताया जाता है कि पिछले चार वर्षों में जिला अस्पताल में तैनात रहे कई सीएमएस ने उन्हें आवास खाली करने के लिए पत्र लिखे। अस्पताल प्रशासन की ओर से सात से अधिक रिमाइंडर भी भेजे गए, लेकिन इसके बावजूद आवास खाली नहीं कराया जा सका। दूसरी ओर, अस्पताल में कार्यरत अन्य कर्मचारियों और लिपिकों को सरकारी आवास न मिलने से परेशानी उठानी पड़ रही है। कर्मचारियों का कहना है कि जिन लोगों का तबादला वर्षों पहले हो चुका है, यदि उनके कब्जे वाले आवास खाली नहीं कराए जाएंगे तो वर्तमान कर्मचारियों को सुविधा कैसे मिलेगी।
सीएमएस डॉ. जगजीवन राम ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में है और संबंधित आवास को खाली कराने की कार्रवाई की जा रही है।