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टैक्स चोरी कर राजस्व को लाखों का चूना लगा रही, टूरिस्ट बसें

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शहर के कालपी बस स्टैंड पर खुले ट्रैवलर्स बस के ऑफिस - फोटो : ORAI
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उरई (जालौन)। टूरिस्ट बसों की डग्गामारी सिर्फ यात्रियों की जान पर भारी नहीं पड़ रही है, बल्कि यह बस संचालक टैक्स चोरी कर राजस्व को भी लाखों रुपये का प्रतिदिन चूना लगा रहे हैं। सब कुछ जानने के बाद भी जिम्मेदार इस पर कोई कार्रवाई नहीं करते, जिससे इन बसों से लगातार मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, गुजरात आदि प्रदेशों से टैक्स चोरी का माल लाया और ले जाया जाता है।
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बता दें कि वाणिज्य कर विभाग की ट्रांसपोर्टरों पर सख्ती के बाद टैक्स चोर गिरोह ने इन टूरिस्ट बसों को टैक्स चोरी का मुख्य जरिया बना लिया है। माफिया इन बसों को अपने माल ढुलाई का मुख्य साधन बनाए हैं। सूत्रों की मानें तो अधिकांश बस संचालक आरटीओ प्रशासन के साथ वाणिज्य विभाग के अधिकारियों से सांठगांठ कर धड़ल्ले से टैक्स चोरी का खेल खेल रहे है। माफिया इन गाड़ियों से प्रतिबंधित माल तक बड़ी आसानी से मंगा लेते हैं। प्रशासन व अन्य लोगों का ध्यान सिर्फ सवारियों पर ही होता है, जिससे माफिया आसानी से इन बसों से माल बिना किसी रोक टोक के मंजिल तक पहुंचा देते हैं।
एक बस ट्रैवल्स संचालक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि किसी भी ट्रैवल्स बस की मुख्य कमाई सिर्फ भाड़े में होती है। सवारियों से तो सिर्फ डीजल का खर्च भर निकलता है। बसों दोनों ओर से माल लाती और ले लाती है। उन्होंने बताया कि जिले से सबसे पास मध्य प्रदेश की सीमा सटी है, इसमें ग्वालियर मुख्य है फिर इंदौर आदि जिले आते हैं। अभी हाल ही में प्रशासन ने ग्वालियर से चलने वाले ट्रांसपोर्टरों पर सख्ती की थी, जिसके बाद माफिया अब ग्वालियर से मुख्यता माल सिर्फ बसों के माध्यम से ही लाते ले जाते हैं। जिससे बस संचालकों की खासी कमाई होती है। ग्वालियर तो सिर्फ बानगी है, राजस्थान, गुजरात, इंदौर आदि से भी माल जिले की मंडियों में लाया और यहां से ले जाया जाता है। एआरटीओ मनोज कुमार कहते हैं कि इन बसों के परमिट के अनुसार रास्तों से सवारियों भरना नियम विरुद्ध है जिसे लेकर लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं और रही टैक्स चोरी की बात तो अभियान में वाणिज्य विभाग की टीम को भी शामिल कर सख्त अभियान चलाया जाएगा।
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बिना बिलों के होती है बुकिंग
टैक्स चोरी का आलम यह है कि माफिया इन बसों में माल बिना बिल के भी दूसरे प्रदेशों में भेज देते है। ट्रैवल्स एजेंट सिर्फ अपना कमीशन लेकर बिना बिल के माल की बुकिंग कर लेते हैं।
माल उतराने के लिए बने हैं प्वाइंट
ट्रैवल्स संचालक भी टैक्स चोरी का माल प्रशासन की नजर से बचाने के लिए अधिकांश माल रात में ही उतारते हैं। इसके साथ ही माल उतारने व चढ़ाने के लिए संचालक अपने आफिसों से कुछ दूरी पर प्वाइंट बनाए हैं, फिर बाद में सवारियां चढ़ाई और उतारी जाती हैं। हालांकि माल की बुकिंग इन्हीं आफिसों से होती है, बसों के आने से कुछ समय पहले ही माल को मंगाया जाता है।
इन प्रदेशों से आता है टैक्स चोरी का माल
सूत्रों की मानें तो इन बसों से सबसे ज्यादा ग्वालियर, इंदौर, कोटा, दिल्ली, अहमदाबाद, राजकोट, सूरत आदि शहरों से जिले में टैक्स की चोरी का माल लाया व ले जाया जाता है। यहां से प्रतिदिन बसें रात में जिले में आती है, जो रात के अंधेर में सुपाड़ी, कपड़ा, गुटखा, पॉलिथीन, साड़ियां व रेडीमेड आदि उतारती हैं।
शहर में जगह-जगह खुले बुकिंग आफिस
टूरिस्ट बसों की ड्ग्गामारी का आलम यह है कि शहर में जगह जगह इनके बुकिंग आफिस खुले है। जो पूर्णता अवैध है। एआरटीओ प्रशासन के नियम अनुसार जो भी टूरिस्ट बसें हैं वह रास्तों से सवारियां लेने के लिए वैध नहीं है और न ही रास्तों में उनका कोई आफिस खोला जा सकता है। उनका परमिट एक जगह से दूसरी जगह तक सवारियों को पहुंचाने का होता है, लेकिन यह बस संचालक डग्गामारी करते हुए जगह-जगह आफिस खोले है। स्थिति यह है कि अधिकांश टूरिस्ट बसों का संचालन कानपुर से होता है। लगभग सभी टूरिस्ट बसों का आफिस कानपुर, भोगनीपुर, पुखराया, जोल्हूपुर मोड़, कालपी के साथ साथ शहर में कोंच बस स्टेंड व कालपी बस स्टेंड आदि जगहों पर आफिस खुले है।
आफिसों में लगता अराजक तत्वों का जमावड़ा
टूरिस्ट बसों की डग्गामारी में न सिर्फ यात्रियों की जान जोखिम में डाली जाती है बल्कि उनके आफिसों में आए दिन सवारियों से मारपीट की घटना आम बात है। स्थिति यह है कि शहर के खुले आफिसों में न सिर्फ अराजकतत्वों का जमावड़ा लगता है बल्कि इन आफिसों में यात्रियों के साथ अभद्रता की सूचनाएं मिलती रहती हैं। कई बार इन आफिसों में मारपीट की घटनाएं हुई, लेकिन ऊंची पहुंच के चलते सब आज तक इन आफिसों को संचालकों पर कार्रवाई नहीं हुई।
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