उरई। पहले लर्निंग और फिर नियमित ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) बनवाने की प्रक्रिया काफी जटिल है। नियमित डीएल बनवाने के लिए आवेदक को कार्यालय स्थित ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक पर अपना हुनर दिखाना होता है। इसमें पास होने के बावजूद जिले के करीब सात सौ आवेदक डीएल का इंतजार कर रहे हैं। एक माह से भी अधिक समय होने के बाद भी इनके डीएल इन्हें नहीं मिल पाए हैं।
जिले में रोजाना करीब 25 से 30 लोग ड्राइविंग टेस्ट में पास होते हैं। करीब पचास लोग डीएल बनवाने या नवीनीकरण के लिए आवेदन करते हैं। पोर्टल के जरिए उनको टेस्ट के लिए तारीख मिलती है। टेस्ट पास करने के बाद भी लोग डीएल के लिए परेशान हो रहे हैं। डीएल लखनऊ में प्रिंट होते हैं और डाक के जरिए भेजे जाते हैं। टेस्ट में पास होने के बाद अधिकतम 15 दिन में डीएल आ जाना चाहिए, लेकिन एक माह से भी अधिक समय होने के बाद भी लोगों को अपना डीएल नहीं मिल पा रहा है। इससे आवेदक एआरटीओ दफ्तर के चक्कर लगा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर उनकी समस्या का समाधान भी नहीं हो पा रहा है।
दरअसल वर्ष 2019 से लाइसेंस की व्यवस्था में परिवर्तन किया गया है। एआरटीओ कार्यालय के स्थान पर लखनऊ से लाइसेंस बनकर आने लगे हैं। वर्तमान में आवेदन करने के बाद बॉयोमीट्रिक और ड्राइविंग टेस्ट स्थानीय स्तर पर होता है। इसके बाद स्मार्ट कार्ड (लाइसेंस) लखनऊ से बनकर डाक विभाग के माध्यम से आवेदक के निवास स्थान पर आता है। कई लोगों के लाइसेंस एक माह बाद भी बनकर नहीं आ पाए हैं। ऐसे में वो कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिल पा रहा है।