मुहम्मदाबाद। कुसमिलिया सहकारी समिति में खाद की कमी से किसान जूझ रहे हैं। किसानों को एक आधार और खतौनी पर शनिवार को दो-दो बोरियां डीएपी उर्वरक ही दिया गया। डीएपी लेने के लिए किसान दिन भर खाद मिलने की आस में बैठे रहे, लेकिन भीड़ के चलते कुछ किसानों को बैरंग घर लौटना पड़ा।
कुसमिलिया सहकारी समिति में दोपहर 2 बजे तक करीब एक सैकड़ा डीएपी बोरियों का स्टॉक ही बचा था। डकोर बीपैक्स लिमिटेड में भी करीब एक माह से डीएपी और यूरिया न पहुंचने से इससे जुड़े करीब आठ गांवों के किसानों को उर्वरक उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। सचिव का कहना है कि नवंबर के शुरूआत में 60 एमटी डीएपी व इतनी ही यूरिया उर्वरक उपलब्ध हुई थी, जिसे किसानों को बांट दी गई है।
उन्होंने बताया कि पिछले साल बीपैक्स लिमिटेड डकोर ने 200 एमटी डीएपी और 283.365 एमटी यूरिया को बांटी गई थी। खाद के लिए किसान रोज चक्कर काट रहे हैं। डकोर की बीपैक्स लिमिटेड से डकोर, जैसारी खुर्द, कहटा, मकरेछा, मोहाना, बंधौली, गुढ़ा, सिमिरिया जुड़े हैं। शनिवार को कुसमिलिया सहकारी समिति में मुस्तफा खां, अरविंद, वीरेंद्र, रामराज, अंशु आदि किसान खाद के लिए परेशान नजर आए।
मुहम्मदाबाद के किसान रामबाबू का कहना है कि 11 बीघा की खेती है, लेकिन उन्हें डीएपी नहीं मिल रही है। वह रोज सहकारी समिति के चक्कर काट रहे हैं। ऐसे में बोआई का समय निकलता जा रहा है। वे कहते है कि यहां से पड़ोसी जिले के लिए खाद ट्रैक्टरों ट्रॉलियों में भर कर दौड़ते नजर आ रहे हैं।
कुठौंदा के किसान रामहेत का कहना है कि पांच बोरियों की जरूरत है और आठ खतौनी लेकर समिति के रोज चक्कर लगा रहे हैं। फिर भी खाद नहीं मिल पा रही है। हम लोगों को समय से खाद मिल पाना सपने के जैसा हो गया है।