चुनाव में नेता विकास नहीं जाति के नाम पर वोट मांग रहे हैं। ऐसे में समस्याओं से जूझ रहे ग्रामीणों ने ही अपने मुद्दे तैयार करने शुरू कर दिए हैं। रामपुरा के खोड़न गांव में कुछ ऐसा ही हो रहा है। ग्रामीणों की मानें तो बरसात के चार महीने में परेशानी बनने वाले नरौल व खोड़न गांव के बीच बने चेकडैम को मुद्दा बनाया जाएगा। इसके कारण उन्हें जलभराव का सामना करना
पड़ता है। ग्रामीणों के मुताबिक मतदाता जागरूकता कार्यक्रम को देखते हुए वे वोट तो जरूर डालेंगे, लेकिन वोट देने से पहले नेताओं को अपनी कसौटी पर परखेंगे। इसके बाद उनका वोट उसी दल के प्रत्याशी को मिलेगा जो उन्हें जलभराव से निजात दिलाएगा। अन्यथा नोटा का विकल्प भी खुला है। बता दें कि लघु सिंचाई विभाग की ओर से रामपुरा क्षेत्र के नरौल से खोड़न
गांव की दूरी चार किलोमीटर है। दोनों गांव के बीच दो वर्ष पहले विभागीय अधिकारियों ने बिना सोचे समझे लाखों की लागत से चेकडैम बनवा दिया। इसका नतीजा यह है कि बरसात के वक्त जलनिकासी की व्यवस्था न होने से बीच रास्ते में जलभराव हो जाता है। दो से तीन फुट तक पानी भर जाने के कारण एक तरह से आवागमन खासा प्रभावित हुआ है। न तो बच्चे
विद्यालय जा पाते हैं और न ही रोजमर्रा के सामान खरीदने के लिए ग्रामीण रामपुरा आ पाते हैं। करीब दो साल से यह समस्या है। कई बार अफसरों के सामने यह मामला रखा गया। बात
नहीं बनी तो राजनीतिक दलों के नेताओं से भी समस्या निदान की मांग की। आश्वासन तो मिला, पर आज तक समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसलिए ग्रामीणों ने चुनाव में वोट डालने के लिए आने वाले नेताओं को सबक सिखाने का मन बनाया है। वे वोट तो करेंगे, मगर उसको ही जो उन्हें समस्या से निजात दिलाएगा।
बरसात में घर के दरवाजे पर तलैया
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम में घरों के दरवाजों पर ताल तलैया जैसी स्थिति रहती है। पुरुष तो फिर भी जैसे तैसे निकलते हैं, लेकिन महिलाओं को बच्चों को घर के भीतर ही कैद सा रहना पड़ता है। उस वक्त कोई नेता और अधिकारी समस्या का समाधान करने के लिए नहीं दिखाई देता है।
पंचायत में नेताओं को सबक देने का निर्णय
बुधवार को खोड़न गांव के ग्रामीणों ने एक बैठक की। इसमें बरसात के वक्त खड़ी होने वाली परेशानी का समाधान कराने के लिए इस बार नेताओं को सबक सिखाने का निर्णय लिया गया। बैठक में ग्रामीणों ने तय किया कि वे आयोग के जागरूकता अभियान से प्रेरित होकर वोट तो डालेंगे, मगर नेताओं के सामने अपना मुद्दा भी रखेंगे। नेता की बात में दम लगा तो ही उसे वोट देंगे। बैठक में प्रभूदयाल, गेंदालाल, पप्पू, बलराम पाल, अरविंद, शिरोमणि, हरप्रसाद, मोहनलाल, महाराज सिंह, ज्ञानेंद्र मौजूद रहे।
ग्रामीणों के तेवरों से नेता भी सकपकाए
ग्रामीणों के चेकडैम मुद्दे की भनक वोट मांग रहे प्रत्याशियों को भी लगी है। इसलिए वे गांव में घुसने से पहले संबंधित अधिकारियों से समस्या और निदान के उपाये जानने में लगे हैं। वे अच्छी तरह समझ रहे हैं कि आखिर पब्लिक जागरूक हुई है, तो सिर्फ कोरे वादे से काम कैसे चलेगा।