फोटो संख्या-03- जालौन ब्लॉक परिसर में अधूरा पड़ा तालाब। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
जालौन। ब्लाक कार्यालय में होने वाले जलभराव से मुक्ति पाने और जल संरक्षण के लिए 20 लाख रुपये की लागत से बनने वाला तालाब 18 साल बाद भी अधूरा पड़ा है। ब्लाक कार्यालय में जनता के धन की बरबादी का साक्षात उदाहरण है। इसमें जल संरक्षण तो हो नहीं पाया बल्कि यह कूड़े के गड्ढे के तब्दील हो गया है। अब इसमें गंदगी जमा हो गई है।
तालाब के अस्तित्व पर भी संकट खड़ा हो गया है। देखरेख के अभाव में तालाब की चाहरदीवारी टूट कर गिरने लगी है।जालौन के ब्लाक कार्यालय में जलभराव की समस्या थी। सड़क ऊंची होने तथा कार्यालय और आवास नीचे होने की वजह से यहां पानी भर जाता था। इस समस्या के समाधान के लिए वर्ष 2005 में ब्लाक परिसर में तालाब बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया।
इसका उद्देश्य जलभराव की समस्या का समाधान होने के साथ-साथ जल संचयन की व्यवस्था करना भी था। तत्कालीन ब्लाक प्रमुख शैलेंद्र सिंह सेंगर उर्फ सज्जन और बीडीओ श्री कृष्ण पांडेय ने कार्यालय परिसर में तालाब की खुदाई कराई। तालाब खुदाई से निकली मिट्टी से कार्यालय परिसर का भराव कराया गया। मिट्टी के भराव होने और उस पर सीसी हो जाने से कार्यालय परिसर की जल भराव की समस्या तो खत्म हो गई लेकिन जल संचयन नहीं हो पाया।
लगभग 20 लाख की लागत से बना तालाब 18 वर्ष बाद भी अधूरा पड़ा है। विभाग की उदासीनता के कारण तालाब की बाउंड्रीवाल टूटने लगी है। जल संरक्षण के लिए तालाब में कार्यालय परिसर का पानी भी नहीं संरक्षित किया जा रहा है। परिसर का पानी भी नालियों के माध्यम से बहाया जा रहा है।
कोट
तालाब का सुंदरीकरण भी अधूरा पड़ा है। तालाब पर टहलने के लिए बनाए जाने वाले रास्ते, बैठने के लिए बनने वाली छतरी भी अधूरी पड़ी है। बीडीओ संदीप यादव का कहना है कि तालाब के सुंदरीकरण पूरा कराने के लिए कई बार शासन को लिखा गया है। शासन से बजट मिलते ही जल्द ही जीर्णोद्धार कराया जाएगा।
दुर्दशा पर लोगों ने जताया आक्रोश
फोटो संख्या- 04- मोहल्ला निवासी प्रतीकांत चंसौलिया ने बताया कि एक ओर सरकार अमृत सरोवरों के माध्यम से जल संरक्षण के लिए प्रयासरत है। ब्लॉक कार्यालय को ही तालाबों की दशा सुधारने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यहां हालत यह है कि खुद ब्लॉक कार्यालय में बना तालाब दुर्दशा का शिकार हो रहा है।
फोटो संख्या-05-, 11-प्रदुम्न दीक्षित
-तालाब की दुर्दशा को लेकर प्रदुम्न दीक्षित कहते हैं कि तालाब का निर्माण यदि पूरा करा दिया जाता तो जिस खस्ताहाल हालत में तालाब पहुंच गया है, वैसी स्थिति नहीं होती। तालाब का हाल देखकर कोई भी कह देगा कि सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है। इससे अच्छा तो कूड़े का गड्ढा ही बनवा दिया जाता।