उरई। वर्षों से पेयजल संकट झेल रहे शहर के लिए बड़ी राहत की शुरुआत हो गई है। अमृत 2.0 योजना के तहत नगर पालिका क्षेत्र की बहुप्रतीक्षित पेयजल परियोजना का भूमि पूजन कर विधिवत शुभारंभ किया गया। यह 133 करोड़ रुपये की मेगा योजना आने वाले वर्षों में शहर की जल व्यवस्था की तस्वीर बदलने का दावा कर रही है।
गर्मी के मौसम में शहर में पानी की किल्लत खड़ी हो जाती है। इस समस्या के निस्तारण के लिए जल निगम ने इसका खाका तैयार किया है। योजना के तहत पूरे शहर में पेयजल आपूर्ति का आधुनिक और मजबूत ढांचा तैयार किया जाएगा। इसके लिए 402.04 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जाएगी। इससे हर वार्ड तक पानी पहुंच सके।
इसके अलावा 15 नए पंप हाउस बनाए जाएंगे जो जलापूर्ति को निरंतर बनाए रखने में मदद करेंगे। वहीं 13 आरसीसी ओवरहेड टैंक का निर्माण कर जल भंडारण और वितरण की क्षमता बढ़ाई जाएगी। करीब 52,207 हाउस कनेक्शन के जरिए घर-घर नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
झांसी रोड स्थित वंशीधर कॉलेज के पीछे आयोजित कार्यक्रम में सदर विधायक गौरीशंकर वर्मा और पालिकाध्यक्ष प्रतिनिधि विजय चौधरी ने भूमि पूजन किया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना न केवल वर्तमान जल संकट को दूर करेगी, बल्कि भविष्य की जरूरतों को भी ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। भूमि पूजन के दौरान अधिशासी अभियंता हिमांशु नेगी, ईओ राम अचल कुरील, सहायक अभियंता मनोज कुमार, नीरज करपात्री, राकेश चौरसिया, अवर अभियंता महावीर, आशीष कुमार रावत सहित अन्य अधिकारी, कर्मचारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
जल निगम के अवर अभियंता महावीर के अनुसार इस परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा और जनवरी 2028 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। अधिकारियों का दावा है कि कार्य गुणवत्ता के साथ समय पर पूरा कराया जाएगा।
इन इलाकों को सबसे ज्यादा फायदा
शहर के शांतिनगर, उमरारखेरा, तुफैलपुरवा, लहारियापुरवा, रामनगर, तुलसी नगर, पटेल नगर, इंदिरा नगर और चौरसी जैसे मोहल्ले लंबे समय से जल संकट से जूझ रहे हैं। गर्मी के मौसम में इन क्षेत्रों में हालात और भी गंभीर हो जाते हैं।
नई योजना के लागू होने के बाद इन इलाकों में नियमित, स्वच्छ और पर्याप्त पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित होने की उम्मीद है।
हर गर्मी में बनती है विकराल स्थिति
शहर के मोहल्ला उमरारखेरा, शांतिनगर, रामनगर, चौरसी रोड, राजेंद्र नगर सहित कई वार्डों में हर साल गर्मी के दौरान नल सूख जाते हैं या दूषित पानी की समस्या बढ़ जाती है। लोगों को टैंकरों या निजी साधनों पर निर्भर रहना पड़ता है। इस परियोजना के जरिए न केवल मौजूदा समस्या दूर करने, बल्कि भविष्य में बढ़ती आबादी के दबाव को भी संभालने की तैयारी की गई है।
डेटा बॉक्स: योजना एक नजर में
कुल लागत: 133 करोड़ रुपये
कुल वार्ड: 34
पाइपलाइन: 402.04 किमी
पंप हाउस: 15
ओवरहेड टैंक: 13
हाउस कनेक्शन: 52,207
लक्ष्य: जनवरी 2028 तक पूर्ण