उरई। नदीगांव क्षेत्र पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर वित्तीय अनियमितताओं के मामले में शासन ने निवर्तमान ब्लॉक प्रमुख अर्जुन सिंह को प्रशासक पद से हटाने का आदेश जारी किया है। वहीं, जिलाधिकारी की संस्तुति पर क्षेत्र पंचायत के सामान्य कार्यों के संचालन के लिए एसडीएम को प्रशासक का चार्ज सौंपा गया है। अब पूरे मामले की अंतिम जांच जिलाधिकारी करेंगे।
पंचायती राज अनुभाग-2 के विशेष सचिव जय प्रकाश पांडेय की ओर से जारी आदेश के अनुसार अर्जुन सिंह के खिलाफ विकास कार्यों में वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतों पर जांच कराई गई थी। अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) की जांच आख्या सात अगस्त 2025 को शासन को भेजी गई थी। इसके बाद शिकायतकर्ता और संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। अर्जुन सिंह को 27 मई और 24 सितंबर 2026 को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाया गया। छह अक्तूबर को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित त्रिस्तरीय समिति ने जांच आख्या शासन को उपलब्ध कराई। इसमें विभिन्न विकास कार्यों में वित्तीय और प्रक्रियागत अनियमितताओं का उल्लेख किया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर शासन ने उन्हें क्षेत्र पंचायत प्रमुख के पद से हटाने का आदेश जारी किया है।
शासन के आदेश के बाद क्षेत्र पंचायत नदीगांव के सामान्य कार्यों के संचालन के लिए प्रशासक नामित करने की प्रक्रिया के निर्देश दिए गए हैं। जिलाधिकारी की संस्तुति पर एसडीएम को प्रशासक का चार्ज सौंपा गया है, ताकि क्षेत्र पंचायत के सामान्य कामकाज का संचालन किया जा सके। दूसरी ओर, अर्जुन सिंह के खिलाफ लगे आरोपों की अंतिम जांच जिलाधिकारी करेंगे। जांच में क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत अधिनियम, 1961 के तहत निर्धारित कर्तव्यों के पालन में विफलता और निहित अधिकारों के दुरुपयोग के आरोपों की पड़ताल की जाएगी। जिलाधिकारी समीर ने कहा कि ब्लॉक प्रमुख को पद से हटाए जाने की कार्रवाई शासन से की गई है। कार्यों को संपादित करने की जिम्मेदारी एसडीएम को सौंपी गई है।
स्ट्रीट लाइट, तालाब और सड़कों के निर्माण पर सवाल
प्रारंभिक जांच में ग्राम सिकंदरपुर में 100 स्ट्रीट लाइटों की स्थापना, ग्राम गढ़ा में रामजानकी मंदिर के पास तालाब की तलहटी, दीवार और पाल में आरसीसी निर्माण तथा ग्राम गंध्या में मकान से जयकरण के मकान तक सीसी निर्माण को लेकर सवाल उठाए गए हैं। ग्राम परासन में सीधी घाट तालाब की खोदाई और बेंच निर्माण, ग्राम शिवनी बुजुर्ग में शिव प्रधान के मकान से शिकाकुमार पजारी के घर तक इंटरलॉकिंग, ग्राम पजोनियां में रोह से पंचायत भवन तक इंटरलॉकिंग और ग्राम कटखरी बुजुर्ग में बब्बू गुर्जर के मकान से मसरतुल्ला जादव तक खड़ंजा निर्माण के लिए सामग्री आपूर्ति भी जांच के दायरे में रही। ग्राम अकनीबा में पप्पू झां के मकान से राधेश्याम के बाड़े तक सीसी निर्माण समेत अन्य कार्यों की पत्रावलियों और भुगतान प्रक्रिया की भी जांच की गई। रिपोर्ट में इन कार्यों से जुड़े वित्तीय और प्रक्रियागत पहलुओं पर सवाल दर्ज किए गए हैं।
53.20 लाख के तालाब निर्माण में निजी भूमि का मामला
ग्राम गढ़ा में तालाब निर्माण से जुड़े मामले में जांच रिपोर्ट ने कई सवाल खड़े किए हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार मनरेगा, राज्य वित्त और केंद्रीय वित्त आयोग की धनराशि से तालाब संबंधी कार्यों पर कुल 53.20 लाख रुपये खर्च किए गए। जांच में निजी भूमि पर निर्माण कराए जाने और संबंधित कार्यों की वित्तीय व प्रशासनिक स्वीकृति के अभिलेख उपलब्ध नहीं होने का उल्लेख किया गया है।
कार्ययोजना मिली, स्वीकृति के दस्तावेज नहीं
जांच आख्या में कई कार्यों की पत्रावलियों में कार्ययोजना उपलब्ध होने के बावजूद वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति से संबंधित प्रपत्र संलग्न नहीं होने की बात कही गई है। कुछ मामलों में निविदा और खरीद संबंधी नियमों का पालन नहीं किए जाने तथा निर्धारित दरों से अधिक दर पर भुगतान किए जाने का भी उल्लेख है। स्ट्रीट लाइट की खरीद में शासनादेशों के उल्लंघन का बिंदु भी जांच रिपोर्ट में शामिल है।
बेटे की फर्म को काम मिलने का भी उल्लेख
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में कुछ कार्यों के लिए न्यूनतम निविदादाता के रूप में मेसर्स पूर्णताप कंस्ट्रक्टर का नाम दर्ज है। रिपोर्ट के मुताबिक, फर्म के प्रोपराइटर अभिमन्यु सिंह, अर्जुन सिंह के पुत्र हैं। फर्म से संबंधित कार्यों में निविदा प्रक्रिया, शासनादेशों के अनुपालन और भुगतान से जुड़े पहलुओं पर भी सवाल उठाए गए हैं।