उरई (जालौन)। तीन दिन पूर्व सूदखोरों से त्रस्त होटल संचालक के जान देने के मामले में कुठौंद पुलिस अभी भी हाथ पर हाथ धरे बैठी है। जबकि होटल संचालक का परिवार अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर लगा रहा है। संचालक के परिजनों का कहना है कि सूदखोरों की नजर होटल पर थी, वे ब्याज के मकड़जाल में संचालक को फंसाकर होटल हथियाना चाहते थे। परिवार के कुछ लोग शुक्रवार दोपहर एसपी से मिलने दफ्तर पहुंचे लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। परिजनों का कहना है कि शनिवार को वे थाने में भी दोबारा तहरीर देने जाएंगे।
बता दें कि तीन दिन पूर्व कुठौंद में होटल चलाने वाले सुबोध ने सूदखोरों से त्रस्त होकर जहर खा लिया था। मौत से पहले सुबोध ने अपने शरीर पर सूदखोरों के न सिर्फ नाम लिखे थे बल्कि अपने सुसाइड नोट में उन्हीं सूदखोरों को अपनी मौत का जिम्मेदार भी ठहराया था। हैरत की बाद तो सुबोध ने मौत से पहले जिस थानेदार व चौकी इंचार्ज पर भरोसा जताकर उन्हीं के नाम पर सुसाइड नोट लिखा था, वहीं पुलिस कर्मी तीन दिन से सूदखोरों के बचाव में लगे नजर आ रहे हैं, न तो सूदखोरों से कोई पूछताछ ही हुई और न ही कोई लिखापढ़ी की गई। यहां तक कि परिजन भी सूदखोरों के भय व पुलिस की हीलाहवाली के कारण कुठौंद स्थित होटल के ऊपर का घर छोड़कर गोहन स्थित अपने पैतृक गांव आकर रहने लगे हैं।
भाई चिंटू और परिवार के करीबी देवेंद्र सिंह का कहना है कि सूदखोरों की नजर सुबोध के राधिका होटल पर थी। बीस प्रतिशत ब्याज के बदले सूदखोर पूरा होटल ही हथियाने की फिराक में थे। इस कारण ही सुबोध को जान देनी पड़ी। बता दें कि सूदखोरों में कुछ औरैया, फतेहपुर जिले के भी है। घटना के बाद से ही क्षेत्र के कुछ सूदखोर मामले को निपटाने के लिए थाना पुलिस के संपर्क में भी हैं। वहीं पूरे मामले में एसपी डॉ सतीश कुमार का कहना है कि घटना के वक्त परिजनों ने सिर्फ सूचना ही दी थी, अभी तक सुसाइड नोट पर आधारित कोई तहरीर नहीं दी गई है। घरवाले जैसी भी तहरीर देंगे, थाना पुलिस मामला दर्ज कर कार्रवाई करेगी।
सुबोध मिश्रा का राधिका होटल- फोटो : ORAI