बुंदेलखंड में सूखे का असर अब हर ओर दिखाई दे रहा है। किसानों की फसलें सूख गईं। अब स्थायी जल स्रोत कुआं और तालाब भी सूखने लगे हैं। सूखा का ही असर है कि दूध का संकट भी खड़ा होने लगा है। बुदेलखंड में गर्मियों के सीजन में वैसे भी दुधारू पशु दूध कम देने लगते थे लेकिन इस बार तो स्थिति बहुत खराब है। पशु पालक खासे परेशान हैं क्योंकि जानवरों
के लिए हरे चारे का प्रबंध नहीं हो पा रहा। भूसा पर जो खर्च आ रहा है। उसे वहन करने में पसीना छूट रहा है। सरकार ने पशुओं के लिए भूसा योजना शुरू जरूर की थी लेकिन उसका क्रियान्वयन ही नहीं हुआ। विभाग ने आखिर में बजट सरेंडर कर दिया। अब हालत यह हो गई कि पशुपालक जानवर बेचने को मजबूर हो रहे हैं। अन्ना जानवर प्रथा भी इसी समस्या
की देन समझी जा रही है। जालौन के कदौरा विकास खंड में पशु बाजार में भी अच्छे पशुओं की कीमत नहीं मिल पा रही है। अच्छे नस्ल की भैंस की कीमत 60 हजार रुपये से घटकर 40 हजार रुपये रह गई है। गाय-बकरी की भी स्थिति यही है। पशु बाजार मेें सन्नाटा सा छाया हुआ है। पशुपालक बाजारों में बेचने के लिए पशु लेकर तो आते हैं, मगर इनका कोई
खरीदार नहीं मिलता। पिछले तीन-चार वर्षों में सूखा, बारिश, ओलावृष्टि के कारण फसलें पूरी तरह से चौपट हो जाने से जानवरों के लिए भूसा व हरे चारे का संकट खड़ा हो गया है। दूध बेचकर परिवार का भरण पोषण करने वाले लोगों का बुरा हाल है। भूसा व चारा न होने की वजह से जानवर बेचने को मजबूर हैं।
नहीं मिल रहा हरा चारा, कम हुआ दूध
कदौरा के फर्राशखाना निवासी पशुपालक रामहेतु साहू का कहना है कि देखते ही देखते भूसा की कीमत 200 रुपये क्ंिवटल से 900 रुपये क्विंटल हो गई है और इस दाम में भी आसानी से भूसा नहीं मिल रहा है। उन्होंने बताया कि दो वर्ष पहले 60 हजार की भैंस ली थी, जो दिन में 10 लीटर दूध देती थी। हरा चारा न मिलने से अब तीन लीटर दूध दे रही है। भूसा व चारे के अभाव में वह भैंस बेचने को मजबूर है।
बेचनी पड़ी गाय, हुए परेशान
अंबेडकरनगर निवासी रामेश्वर ने बताया कि वह भूमिहीन है। दूध के लिए गाय खरीदी थी। गाय को चराकर उसके दूध से घर का खर्च चलते थे। भूसा केे दाम आसमान पर है जिसे वह खरीदने में असमर्थ हैं और हरा चारा है नहीं। इससे गाय को चराकर पेट भी नहीं भर सकते। ऐसेमें गाय को बेचना मजबूरी हो गई। हरे चारे की कमी न होती तो गाय उसके लिए कामधेनु साबित हो रही थी।
यह पशुपालक भी परेशान
सूखा किसानों और पशुपालकों पर कहर बनकर टूटा है। पशुपालक बिरजू, कुमार, रामशंकर, रेखा देवी भी सूखा के आगे बेबस हो गए। दूध कम होने से पशुओं का पेट भरना भी मुश्किल हो रहा है। पशुपालक गाय, भैंस के छोटे बच्चे अन्ना कर दे रहे है। इतना ही नहीं दूध न देने वाले भी अन्ना कर दिए गए है।
वर्जन
सूखे की वजह से फसलों में भूसा न होने से जानवरों के लिए समस्या तो है लेकिन विकास खंड कदौरा के लमसर, अकबरपुर, इकौना में भूसा सेेंटर खोलने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। फिलहाल किसी पशुपालक ने भूसा की मांग नहीं की है।- ब्रजेंद्र सचान, पशु चिकित्साधिकारी कदौरा