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सुधरेगी डॉक्टरों की लिखावट, पर्चो का होगा आडिट

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डॉ अरुण कुमार राजपूत - फोटो : ORAI
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उरई। दवाओं पर डाक्टरों की बेतरतीब लिखावट में सुधार के लिए शासन ने पहल की है। अब शासन के निर्देश पर सरकारी अस्पतालों के हर डाक्टर के पांच पर्चों का आडिट होगा। हर अस्पताल से तीस पर्चों का आडिट किया जाएगा। आडिट के बिंदु भी तय कर दिए गए हैं। हर महीने आडिट होगा और हर तीन महीने में आडिट की समीक्षा होगी। समीक्षा के बाद सुधार के निर्णय लिए जाएंगे। अभी तक डाक्टर और फार्मासिस्ट या मेडिकल स्टोर संचालक ही डाक्टर की लिखावट पढ़ पाते थे लेकिन अब मरीज भी डाक्टर की लिखावट को समझ सकेगा।
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डाक्टरों की लिखावट में सुधार और बाहरी दवाओं के लिखने पर रोक के लिए शासन के निर्देश पर बाह्य रोगी और अंत रोगी विभाग के मरीजों की प्रीक्रिप्शन (दवा के पर्चे या नुस्खा) और भर्ती मरीजों की डिटेल बेड हैड टिकट (बीएचटी) का आडिट होगा। इसमें बाह्य रोगी और अंत रोगी मरीजों का अलग अलग बिंदुओं पर आडिट होगा। जिला कायाकल्प परामर्शदाता डा. अरुण कुमार राजपूत ने बताया कि बाह्य रोगी मरीजों के पर्चे में मरीज का नाम, पता, लिंग, टैंपचर, पल्स, श्वसन, दिनांक, रोगी का विस्तृत रोगी संबंधी ब्योरा, जांच की संस्तुति, दवा का कार्यकाल, कितनी दवा, कब और कैसे खिलाई जानी है, यह विस्तार से लिखा है या नहीं।
कहीं लगाने वाली सीरप मरीज पी तो नहीं रहा है, दवा जेनरिक या ट्रेड, डाक्टर के हस्ताक्षर हैं या नहीं। दवाएं अस्पताल में उपलब्ध सूची के मुताबिक हैं या नहीं समेत 25 बिंदुओं का आडिट होगा। जबकि भर्ती होने वाली मरीजों में मरीज की डिटेल, उसकी बीमारी, कितने बार डाक्टर ने देखा, कौन कौन सी जांच हुई है और कौन होनी है। आपरेशन के पहले और आपरेशन के बाद की स्थिति, डिस्चार्ज के समय क्या दिशा निर्देश दिए गए। फालोअप के लिए क्या कहा गया समेत 15 बिंदुओं की जांच होगी।
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डाक्टर और फार्मासिस्ट की टीम करेगी आडिट
कायाकल्प परामर्शदाता डा. अरुण ने बताया कि सभी जिला अस्पताल, महिला अस्पताल एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केेंद्रों में शासन के निर्देश पर यह आडिट होगा। इसमें किसी भी डाक्टर के पांच मरीजों के पर्चे आडिट में लिए जाएंगे। एक अस्पताल से हर महीने तीस पर्चों का आडिट होगा। आडिट करने के लिए एक डाक्टर और एक फार्मासिस्ट की तैनाती कर दी गई है। हर तीन महीने में होगी समीक्षा होगी।
आडिट में कमियां मिलने पर कराया जाएगा सुधार
एक जनवरी से यह काम शुरू कर दिया गया है। अब हर महीने जिला स्तर पर रिपोर्ट ली जाएगी और हर तीन महीने में शासन स्तर पर इसकी समीक्षा होगी। आडिट में जो भी कमियां निकलकर आएंगी, उसके अनुसार सुधार के निर्णय लिए जाएंगे। इसका एक लाभ यह भी होगा कि मरीज भी अपने पर्चे में लिखी दवा और जांच के के बारे में जान सकेगा।
बाहर से दवा लिखने पर भी लगेगी लगाम
उरई। इस कवायद पर छोटी पर्ची पर बाहर की दवाएं लिखने वाले डाक्टरों पर भी लगाम लगेगी। डाक्टर छोटी पर्ची पर दवा लिखने से परहेज करेंगे, साथ ही यदि बाहर से दवा लाने के लिए पर्ची मिलती है तो ऐसे डाक्टर की शिकायत अधिकारियों से की जाएगी।
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