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Jalaun News: मुंबई-कानपुर के ड्रग्स कारोबारियों के इशारे पर चल रही थी फैक्टरी

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फोटो - 18 शैलेंद्र सिंह पाल के घर के बाहर पसरा सन्नाटा। संवाद - फोटो : Samvad
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साइड स्टोरी....
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फोटो - 20 कंपनी से बरामद माल को पैक करते कर्मचारी। संवाद
फैक्टरी संचालक शैलेंद्र फरार, गोशाला के बगल में टिनशेड डालकर गुलाबजल की आड़ में तैयार कर रहे थे एमडी ड्रग्स

हेमंत को काम शुरू कराने के लिए मिले थे 20 लाख रुपये, हर माह एक लाख देने की थी बात

संवाद न्यूज एजेंसी

मुहम्मदाबाद (उरई)। डकोर कोतवाली क्षेत्र के ऐरी रमपुरा गांव में गुलाबजल बनाने की आड़ में एमडी ड्रग्स तैयार करने के मामले में मुंबई और कानपुर के ड्रग्स कारोबारियों का नाम सामने आ रहा है। सूत्रों के मुताबिक इन्हीं कारोबारियों के इशारे पर गांव में नशीले पदार्थ का निर्माण कराया जा रहा था।
गोशाला के बगल में टिनशेड डालकर करीब पांच माह से चल रही फैक्टरी पर बृहस्पतिवार तड़के डीआरआई और एटीएस की संयुक्त टीम ने छापा मारा था। कार्रवाई के बाद फैक्टरी संचालक शैलेंद्र सिंह पाल फरार हो गया है। जांच एजेंसियां अब कारोबार से जुड़े अन्य लोगों और नशीले पदार्थ की आपूर्ति के नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हैं।
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सूत्रों के अनुसार फैक्टरी स्थापित होने के बाद हमीरपुर जिले के गोहांड निवासी हेमंत को काम शुरू कराने के लिए 20 लाख रुपये दिए गए थे। इसके अलावा उसे हर माह एक लाख रुपये देने की बात तय हुई थी। वहीं, शैलेंद्र सिंह पाल के खेत में फैक्टरी संचालित करने के लिए 25 हजार रुपये प्रतिमाह दिए जाने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि बाद में शैलेंद्र भी इस कारोबार में साझेदार बन गया था। हालांकि, रकम के लेनदेन और कारोबार में शामिल लोगों की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

ग्रामीणों के मुताबिक फैक्टरी में गुलाबजल बनाने की बात कही जाती थी। इसके लिए आसपास के गांवों से गुलाब की पंखुड़ियां खरीदी जाती थीं। बाहर से रसायन और लिक्विड यूरिया भी मंगाया जाता था। गुलाब की पंखुड़ियों की खरीदारी और निर्माण कार्य की वजह से ग्रामीणों को लंबे समय तक किसी तरह का संदेह नहीं हुआ। आरोप है कि इसी आड़ में एमडी ड्रग्स तैयार की जा रही थी। फैक्टरी गोशाला के बगल में होने के बावजूद किसी को इस गतिविधि की भनक नहीं लगी।

बिना नंबर की कार से आते-जाते थे लोग

ग्रामीणों के अनुसार, फैक्टरी में बिना नंबर की कार से लोगों का आना-जाना होता था। कार से आने वाले लोग मजदूरों को लेकर भी जाते थे। गुलाबजल बनाने की बात कहकर काम संचालित किए जाने से आसपास के लोगों को शक नहीं हुआ। छापे के दौरान टीम ने मौके से बिना नंबर की कार, पानी का टैंकर, दो बाइकें और अन्य सामग्री बरामद की थी। अब जांच एजेंसियां वाहनों के इस्तेमाल और फैक्टरी तक कच्चा माल पहुंचाने वालों के बारे में जानकारी जुटा रही हैं।

मुंबई में नमूना ले जाने के बाद खुला मामला

सूत्रों के मुताबिक, तैयार एमडी ड्रग्स का नमूना लेकर आरोपी मुंबई गए थे। वहां सौदे की कोशिश के दौरान किसी व्यक्ति ने डीआरआई को इसकी सूचना दे दी। इसके बाद टीम ने निगरानी शुरू की और करीब तीन दिन तक फैक्टरी की रेकी की। बृहस्पतिवार तड़के पांच गाड़ियों से पहुंची संयुक्त टीम ने छापा मारकर कार्रवाई की। मौके से करीब 12.5 किलो तैयार एमडी ड्रग्स बरामद होने की जानकारी सामने आई है। इसकी कीमत करीब साढ़े चार करोड़ रुपये बताई जा रही है। टीम ने कच्चा माल और ड्रग्स बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री भी बरामद की थी।
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पार्टियों में नशे के लिए इस्तेमाल होती है एमडी ड्रग्स

एमडी ड्रग्स एक कृत्रिम नशीला पदार्थ है, जिसका इस्तेमाल नशे के लिए किया जाता है और यह हाईप्रोफाइल पार्टियों में भी प्रचलित है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि रमपुरा में तैयार की जा रही ड्रग्स की आपूर्ति किन लोगों को की जानी थी। साथ ही मुंबई और कानपुर के कथित कारोबारियों की भूमिका, रकम के लेनदेन और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है। फैक्टरी संचालक शैलेंद्र सिंह पाल के फरार होने के बाद उसकी तलाश भी महत्वपूर्ण हो गई है। मामले में आरोपियों की भूमिका और कथित नेटवर्क की पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

फोटो - 18 शैलेंद्र सिंह पाल के घर के बाहर पसरा सन्नाटा। संवाद- फोटो : Samvad

फोटो - 18 शैलेंद्र सिंह पाल के घर के बाहर पसरा सन्नाटा। संवाद- फोटो : Samvad

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