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शरीर सुख चाहता है, आत्मा शांति : जगद्गुरु रामस्वरूपाचार्य

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फोटो - 02 कथा सुनाते जगद्गुरु रामस्वरूपाचार्य। संवाद
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कुठौद। कस्बे में चल रहे भव्य पांच कुंडीय विष्णु यज्ञ के छठवें दिन भक्तिभाव और आध्यात्मिक रंगों से सराबोर रहा। सुबह से ही श्रद्धालु बड़ी संख्या में कथा स्थल पर पहुंचने लगे और वातावरण जय श्रीराम व हरि-हरि के जयघोष से गूंज उठा।
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दोपहर की मुख्य कथा में कामदगिरि पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामस्वरूपाचार्य ने कहा कि शरीर हमेशा सुख की तलाश करता है पर आत्मा को केवल शांति चाहिए। यह शांति न तो धन में है न वैभव में, बल्कि भगवान की कथा सुनने और उनके दर्शन करने में हैं। कहा कि आत्मा स्वयं में ही परमात्मा का निवास स्थान है। इसी कारण भारत की परंपरा में मंदिरों का निर्माण और कथाओं का आयोजन सदियों से होता आया है, ताकि मनुष्य व्यस्त जीवन से समय निकालकर आत्म-संतुष्टि पा सके।
उन्होंने बताया कि प्रभु श्रीराम ने विवाह के उपरांत 12 वर्ष अयोध्या में व्यतीत किए और इस काल में धर्म, नीति और परिवार- मर्यादा का अनुपम आदर्श स्थापित किया। कथा मंडप में बैठे श्रद्धालु आचार्य जी के प्रवचन को मंत्रमुग्ध होकर सुनते रहे। कई बार भाव-विभोर होकर श्रद्धालु जय श्रीराम के जयघोष करते नजर आए।
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इसके बाद भागवत कथा में कथावाचक पुनीत मिश्रा ने गोवर्धन लीला का वर्णन भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को उंगली पर उठाकर ब्रजवासियों को प्राकृतिक प्रकोप से बचाया और यह संदेश दिया कि प्रकृति और धर्म -दोनों की रक्षा ईश्वर स्वयं करते हैं।
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कार्यक्रम में परीक्षित, सुनीता शुक्ला, जयप्रकाश शुक्ला, विवेक सिंह चौहान, आशीष चतुर्वेदी, बबलू पाल मौजूद रहे।
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