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बिना बच्चों के स्कूल आने का आदेश शिक्षकों को पसंद नहीं

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धर्मेंद्र सिंह चौहान - फोटो : ORAI
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जालौन। सरकार के निर्देश पर परिषदीय स्कूलों के शिक्षक स्कूलों में पहुंचने लगे हैं लेकिन अधिकांश शिक्षकों का कहना है कि विद्यालय में बच्चे आ नहीं रहे हैं। सरकार हठधर्मिता दिखाते हुए शिक्षकों को विद्यालय में बुला रही है, जबकि जो कार्य कराए जा रहे हैं वह शिक्षक घर पर रहकर पहले भी कर रहे थे और अब भी कर सकते हैं। परिषदीय विद्यालयों को क्वारंटीन सेंटर बनाए जाने के बाद उनको सैनिटाइज भी नहीं कराया गया है। ऐसे में शिक्षकों को संक्रमण की भी आशंका सता रही है। इन्हीं को लेकर शिक्षकों ने कुछ इस प्रकार अपनी प्रतिक्रियाएं व्यक्त की हैं।
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नहीं दी गई शिक्षकों को सुरक्षा की गारंटी
शिक्षक विद्यासागर मिश्र कहते हैं कि सरकार ने शिक्षकों को विद्यालय में पहुंचने के लिए तो कह दिया है। लेकिन उनकी सुरक्षा की सरकार को कोई चिंता नहीं है। लॉकडाउन के दौरान विद्यालयों को क्वारंटीन सेंटर बनाया गया था। इसके बाद उन्हें सैनिटाइज भी नहीं किया गया है। जिसके चलते शिक्षकों को स्वास्थ्य की चिंता सता रही है। केंद्र सरकार ने स्कूल कॉलेज को 31 जुलाई तक बंद रखने के निर्देश दिए हैं।
पीपीई किट उपलब्ध कराई जाए
शिक्षक जावेद अहमद कहते हैं कि सरकार यदि शिक्षकों को विद्यालय बुला रही है तो पहले उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। पहले स्कूलों को सैनिटाइज कराया जाए। संक्रमण से बचाने के लिए शिक्षकों को पीपीई किट उपलब्ध कराई जाए। बच्चे स्कूल आ नहीं रहे हैं, ऐसे में शिक्षकों को विद्यालय बुलाने का कोई मतलब नहीं है। सरकार को जो भी सूचनाएं या अन्य कार्य कराने हैं वह शिक्षक घर से ही सभी सूचनाएं भेज सकते हैं।
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50 लाख का मुआवजे की हो व्यवस्था
शिक्षक लालजी पाठक ने बताया कि शिक्षक कार्य स्कूल जाकर बच्चों को पढ़ाना है। कोरोना संक्रमण के चलते बच्चे स्कूल नहीं आ पा रहे हैं। ऐसे में शिक्षक घर पर रहकर छात्रों को ऑनलाइन शिक्षा दे सकते हैं। स्कूलों में शिक्षण के अतिरिक्त अन्य कार्य शिक्षक पहले भी कर रहे थे। उन कार्यों को शिक्षक घर पर रहकर अब भी कर सकते हैं। यदि शिक्षक को ड्यूटी पर बुलाया ही जा रहा है तो उन्हें ऑन ड्यूटी संक्रमण होने पर 50 लाख का मुआवजा दिया जाए।
कोरोना मरीज मिला, फिर भी स्कूल खोलने का आदेश
प्राथमिक विद्यालय अकोढ़ी दुबे में तैनात शिक्षक धर्मेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि ब्लॉक का पहला कोरोना संक्रमित मरीज उनके गांव में ही मिला था। इसके बावजूद विद्यालय खोला जा रहा है। जबकि अन्य गांव के लोगों के सैंपल लिए गए थे उनकी रिपोर्ट आना बाकी है। वहीं, विद्यालय भी सैनिटाइज नहीं किया गया है। जिसके चलते परिजनों को स्वास्थ्य की चिंता सता रही है। ऐसे में गांव में संक्रमण को देखते हुए विद्यालय को बंद रखना चाहिए।

लालजी पाठक- फोटो : ORAI

विद्यासागर- फोटो : ORAI

जावेद अहमद- फोटो : ORAI

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