उरई। स्वामी विवेकानंद महान संत ही नहीं वरन विचारक, लेखक और मानव प्रेमी थे। महात्मा गांधी को आजादी की लड़ाई में जो जनसमर्थन मिला था, वह स्वामी विवेकानंद की अपील का ही फल था। स्वामी विवेकानंद का कथन उठो, जागो और जागकर औरों को जगाओ, अपने नर जन्म को सफल करो और तब तक न रुको, जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए। यह बात मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ डी नाथ ने शनिवार को कालेज के ऑडिटोरियम सभागार में मेडिकल एथेक्सि सेमिनार में कही।
प्राचार्य ने सभी को स्वामी विवेकानंद के विचारों का अनुसरण करने के लिए प्रेरित किया। मेडिसन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ नूतन अग्रवाल ने स्वामी विवेकानंद के जीवन चरित्र पर प्रकाश डाला। कहा कि यह आवश्यक नहीं कि सौ साल की आयु प्राप्त की जाए। यदि मानवता की सेवा की जाए तो स्वामी विवेकानंद की तरह 39 साल की आयु भी पर्याप्त है। डॉ कुलदीप चंदेल ने पोस्ट कोविड मरीजों की समस्याओं पर चर्चा कर उनके निदान के उपाय बताए। संचालन डॉ एस करीम अंसारी ने किया। इस दौरान डॉ वीरेंद्र गुप्ता, डॉ आरएन कुशवाहा, डॉ आरके सिंह, डॉ सुशीला, डॉ जीएस चौधरी, डॉ शैलेंद्र, डॉ चरक सांगवान आदि मौजूद रहे।
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शैक्षणिक परिसरों में अच्छा वातावरण बने
उरई। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की राष्ट्रीय मीडिया प्रकोष्ठ की दो दिवसीय वर्चुअल कार्यशाला में मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील अंबेकर ने मीडिया प्रकोष्ठ टीम सदस्यों को टिप्स दिए। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक परिसरों में अच्छा वातावरण रहे। इसके लिए महासंघ से समाज की अपेक्षा भी बढ़ी हैं। भारतीय इतिहास, शिक्षा में हो रहे नए परिवर्तनों को सही तरीके से मीडिया के माध्यम से जन जन तक पहुंचाना है। कार्यशाला में जेपी सिंघल, रोहित कौशल, महेंद्र कपूर आदि ने विचार रखे। (संवाद)