उरई। शहर में करीब 500 अस्थायी दुकानदार वर्षों से चोरी की बिजली इस्तेमाल कर रहे हैं। बिजली विभाग के अधिकारियों को इसकी जानकारी के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इन दुकानों में हर महीने लगभग 10 से 15 लाख रुपये की बिजली चोरी की जा रही है। वहीं, विभागीय जिम्मेदार मौन हैं।
शहर के विभिन्न इलाकों, जैसे आंबेडकर चौराहा, कालपी बस स्टैंड, कोंच बस स्टैंड, चुर्खी रोड, जालौन बाईपास, राजेंद्र नगर, सुशील नगर, झांसी बाईपास सहित कई अन्य स्थानों पर सड़क किनारे सैकड़ों अस्थायी दुकानें संचालित हैं। ये दुकानदार पास की बिजली लाइनों से अवैध रूप से केबल जोड़कर बिजली का उपयोग कर रहे हैं। हर दुकानदार औसतन 1500 से 2000 रुपये की बिजली हर महीने उपयोग कर रहा है। बिजली चोरी की यह समस्या केवल राजस्व हानि का कारण नहीं बन रही, बल्कि यह बिजली की आपूर्ति और गुणवत्ता को भी प्रभावित कर रही है। यदि विभाग जल्द से जल्द ठोस कदम नहीं उठाता तो यह समस्या और गंभीर हो सकती है।
बिजली चोरी से चार्ज हो रहे ई-रिक्शा
बिजली चोरी का एक और बड़ा जरिया ई-रिक्शा चार्जिंग है। रात के समय ई-रिक्शा चालक अवैध रूप से केबल डालकर अपनी बैटरियों को चार्ज करते हैं। कुछ चालक घरेलू कनेक्शन के माध्यम से भी अपने ई-रिक्शा चार्ज कर रहे हैं। इससे बिजली विभाग को हर महीने करीब 20 से 25 लाख रुपये की क्षति हो रही है। बिजली विभाग ने कुछ समय पहले ई-रिक्शा चालकों की सूची मंगवाई थी, जिसमें लगभग 3000 ई-रिक्शों की जानकारी दर्ज की गई थी। एक ई-रिक्शा औसतन दो किलोवाट बिजली की खपत करता है, जिससे मासिक खर्च लगभग 3,000 से 4,000 रुपये तक आता है। शहर की कांशीराम कॉलोनी में ही 400 से 500 ई-रिक्शा अवैध रूप से बिजली का उपयोग कर रहे हैं।
वर्जन-
सड़क किनारे अस्थायी दुकानदारों को अस्थायी कनेक्शन दिए जाएंगे। यदि वह ऐसा नहीं कराते हैं तो उनके खिलाफ बिजली चोरी की रिपोर्ट दर्ज की जाएगी। साथ ही ई-रिक्शा चालकों को भी वाणिज्यिक कनेक्शन लेने के निर्देश दिए गए हैं। इस संबंध में सभी जेई को सूची सौंपकर अभियान शुरू किया जाएगा।
- जितेंद्र नाथ, अधिशासी अभियंता, बिजली विभाग