रामपुरा। देश में फैली वैश्विक बीमारी के चलते लाकडाउन के दौरान युवा साहित्यकार कृष्णकुमार द्विवेदी अपनी स्वरचित रचनाओं के माध्यम से लोगों को घरों में बने रहकर लड़ाई को मजबूती देने का संदेश दिया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहीं उनकीं संदेशपरक रचनाओं को लोग खूब पसंद कर रहे हैं।
कवि कृष्णकुमार द्विवेदी कहते हैं की कोरोना संक्रमण पूरे विश्व में अपने पैर फैला चुका है। ऐसे में लाकडाउन का पूर्ण पालन करके इस जंग को जीतना है। हमारा दायित्व है कि किसी न किसी माध्यम से लोगों को जागरूक कर उन्हें घर में रहने के लिए प्रेरित करें। ऐसे में वह भी स्वरचित रचनाओं के माध्यम से यह पहल कर रहे है। वे अभी तक अपनी दो दर्जन रचनाएं व्हाट्सएप व फेसबुक के माध्यम से लोगों तक पहुंचा चुके है। कोरोना चालीसा जन्म हुआ है चीन में, कोरोना है नाम, अंतिम क्षण में कर रहा भारत में विश्राम लिखा है। वहीं गीत ऐ मेरे वतन के लोगों, मत करना तुम मनमानी, संक्रमित हुए हैं जो, उनकी जरा याद करो जिंदगानी। वक्त नासाज है, न सफर में रहो, अपने ही गांव में व शहर में रहो, जैसी संदेशपरक रचनाओं को लोगों द्वारा खूब सराहा जा रहा है।
ऑनलाइन सिखा रही बुंदेली साग सब्जी बनाने का हुनर
उरई। लॉकडाउन के दौरान घरों के अंदर रुकने की सलाह सरकारी तंत्र और शिक्षण संस्थान दे रहे हैं। स्कूल कालेजों में ऑनलाइन पढ़ाई शुरू हो गई है। ऐसे में घर में रसोई के अंदर उपलब्ध सामानों से बुंदेली साग सब्जी बनाने का हुनर टीकाराम यादव पीजी महाविद्यालय की गृह विज्ञान की विभागाध्यक्ष डॉ पिंकी सिंह स्नातक ओर स्नातकोत्तर की छात्राओं को ऑनलाइन सिखा रही है। कॉलेज बंद हैं, ऐसे समय में गृह विज्ञान की विभागाध्यक्ष डॉ पिंकी सिंह अपने घर उरई में रहकर बच्चों को ऑनलाइन क्लास ले रही है। रसोई के अंदर मौजूद सामग्री का सदुपयोग किस तरह किया जाए, यह समझा रही हैं। कई दिनों तक बिना बाहर से सामग्री, साग सब्जी मंगाए कैसे बेहतर तरीके से घर का संचालन किया जा सकता है, यह बता रही हैं। रसोई में तमाम ऐसी चीजें हैं जो ना केवल आपके स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हैं बल्कि कोरोना वायरस से लड़ने के लिए आवश्यक रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए भी लाभदायक होती है। डॉ पिंकी छात्राओं को ऑनलाइन घर पर मास्क बनाने की विधि की ट्रेनिंग भी दे रही है।
पिंकी सिंह- फोटो : ORAI