फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बदलाव से बढ़ी जनपद के विकास की रफ्तार

विज्ञापन
महेबा ब्लाक के मंगरौल गांव के पास लगभग 226 करोड़ की लागत से 600 जवानों की क्षमता वाले पुलिस ट्रेनिंग व? - फोटो : ORAI
विज्ञापन
कालपी (जालौन)। देश अपना 71 वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है। इन सालों में यदि देश ने भी चांद तक पहुंचने का सफर तय किया तो जनपद भी इस तरक्की की दौड़ में कहीं पीछे नहीं रहा। अंग्रेजी हुकूमत से जंग लड़कर देश को आजाद कराने में झांसी रानी समेत कई बुंदेलियों के बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता है। शायद यही वजह है कि समय के साथ देश में हुए बदलाव ने जनपद की भी आबोहवा के साथ-साथ सामाजिक, शैक्षिक, राजनीतिक और भौगोलिक क्षेत्र सभी में चौंकाने वाले परिवर्तन किए हैं। जिससे जनपद में भी विकास की रफ्तार बढ़ी है।
विज्ञापन

आज बीहड़ों के स्थान पर खेत, अस्पताल, स्कूल, कालेज, आईटीआई, पालीटेक्निक कालेज आदि खुले नजर आ रहे हैं तो कभी सिंगल रोड से जुड़े जनपद में अब हाईवे पर वाहन फर्राटा भर रहे हैं। जिन इलाकों में कभी डकैतों की गोलियां गूंजा करती थी, वहां आज स्कूलों से सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तां हमारा के गीत सुनाई देते हैं। इलाज के लिए मेडिकल कालेज और खेलों के लिए इंदिरा स्टेड़ियम भी जिले को मिला। राजनीतिक क्षेत्र की बात करें तो जनपद जालौन देश के वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद तक की कर्मस्थली रहा है।
उद्योग धंधों को जरूर रफ्तार नहीं मिली पर ऐसा भी नहीं है कि उद्यमी किसी भी दौड़ में बहुत पीछे रहे हो, कालपी का हाथ कागज विदेशों तक में अपनी धाक जमा चुका है। धार्मिक, पौराणिक और ऐतिहासिक क्षेत्रों में भी जनपद जालौन का नाम वेद व्यास की जन्म भूमि, सूर्य मंदिर, लंका मीनार, बारह खंभा, पचनद आदि नामों के साथ अपनी अलग पहचान बना चुका है। एट क्षेत्र के रामकथा वाचक राजेश रामायणी ने अपनी सुमधुर वाणी से भी दुनिया भर में जनपद की पहचान कराई। कानून व्यवस्था इस कदर चुस्त दुरुस्त हुई कि कभी बीहड़ के डकैतों से जाना जाने वाला जनपद जालौन अब पुलिस प्रशिक्षण विद्यालय खुलने से आज पूरे बुंदेलखंड की शान बना हुआ है।
विज्ञापन

घूंघट से निकलकर आगे बढ़ीं महिलाएं
लोकतंत्र सेनानी 76 वर्षीय रमेश तिवारी इन 70 सालों के बदलाव पर चर्चा करते हुए बताते हैं कि भौगोलिक क्षेत्र से लोकसभा क्षेत्र में भी बदलाव हुआ व कानपुर देहात की भोगनीपुर विधानसभा को इसी लोकसभा में जोड़ दिया गया। पहले कालपी व माधौगढ़ एक विधानसभा हुआ करती थी फिर जिले में अलग-अलग चार और अब तीन विधानसभा कर दी गईं। सामाजिक दृष्टि से भी काफी बदलाव आया है। जनपद की महिलाओं ने भी घूंघट से निकलकर पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाना शुरू कर दिया है। आज जनपद की कई महिलाएं न सिर्फ पढ़लिख कर आत्मनिर्भर बनी हैं बल्कि बिना पढ़ी महिलाएं भी समूहों के माध्यम से समाज में अपना अलग स्थान बना रही है।
डकैतों का नहीं अब चलता कानून का राज
लोकतंत्र सेनानी 73 वर्षीय महेबा ब्लॉक के भगौरा गांव के निवासी राम प्रकाश गुप्ता बताते हैं कि आजादी के बाद एक वक्त ऐसा भी था कि यहां के युवाओं के पास रोजगार और खेती के साधन नहीं थे, कानून व्यवस्था भी मजबूत नहीं थी। जिसका दुष्परिणाम यह हुआ कि क्षेत्र डकैतों का गढ़ बनने लगा। लोग शाम ढलते ही घरों में दुबक जाया करते थे। फिर समय बदला गांव की पगडंडियों की जगह सड़कों ने ली और अन्य जनपदों से जुड़ने वाले मार्ग पर हाईवे तैयार हुआ और देखते ही देखते डकैतों का सफाया होने लगा। आज तो फूलन देवी के गांव की लड़कियां भी पुलिस में भर्ती हो रही हैं। डकैतों के नाम से पहचाने जाने वाले गांव आज सेना के सूबेदार या पुलिस अधिकारी के गांव के नाम से पुकारे जाते हैं।
ऐसा कोई गांव-कस्बा नहीं जहां न हों स्कूल
92 साल के बुजुर्ग समाजसेवी अहमद हुसैन कहते हैं कि आजादी के सालों बाद भी जनपद में कभी आपसी भाईचारा व हिंदू मुस्लिम एकता कमजोर पड़ती नहीं दिखाई दी। आजादी की लड़ाई में यहां के हिंदू मुसलमान दोनों का ही योगदान रहा है। एक वक्त था कि जब जिले में स्कूल, कालेज और अस्पतालों की कमी थी। अब देखें तो शायद ही ऐसा कोई गांव हो जहां बच्चों के लिए स्कूल और ऐसा कोई कस्बा हो जहां किशोर व युवाओं के लिए कालेज न हो। उरई में तो मेडिकल कालेज और पालीटेक्निक तक की सुविधा उपलब्ध है। इसी तरह पहले जो सफर साइकिल से तय हुआ करता था, आज वही सफर ट्रेन व बसों से पूरा हो रहा है।

सालों बाद उरई झांसी के बीच पड़ने वाली एट ग्राम पंचायत को नगर पंचायत का दर्जा साल 2019 में मिला। सालों- फोटो : ORAI

रमेश तिवारी- फोटो : ORAI

रामप्रकाश- फोटो : ORAI

उरई के स्टेशन चौराहे पर लगी झांसी रानी बाई की प्रतिमा- फोटो : ORAI

उरई में स्थापित ब्रिटिश शासन काल का टाउन हॉल- फोटो : ORAI

कालपी स्थित रानी लक्ष्मीबाई का घाट- फोटो : ORAI

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें