उरई (जालौन)। खेत पर काम करने के बहाने ले जाकर पिता की फावड़ा मारकर हत्या कर शव जलाने में दोष सिद्ध होने पर न्यायाधीश ने दोषी बेटे को आजीवन कारावास की सजा सुनाकर तीस हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है।
सिरसा कलार थाना क्षेत्र के निबहना गांव निवासी सुभाष सिंह ने थाना पुलिस को तहरीर दी थी। बताया था कि 11 जून 2020 को उसका भाई नरेश, पिता विश्राम सिंह को अपने खेतों की तरफ ले गया था। तब उसके हाथ में फावड़ा और तसला था। उसे छोटे भाई मानसिंह और भतीजे धीरेंद्र ने जाते देखा था। दोपहर तक पिता जब खाने के लिए घर नहीं आए तो वह खेत पर देखने के लिए पहुंचा।
वहां आम के पेड़ के नीचे बड़ा भाई नरेश आग जलाते मिला। जब उसने पूछा कि इतनी आग क्यों जला रहे हो तो वह बोला कि उसकी इच्छा है। फिर उसने पूछा कि पिताजी कहां पर है तो वह बोला कि उसे पता नहीं है। इसके बाद शाम को वह फिर खेत पर पहुंचा तो नरेश सिंह वही मिला। शक होने पर उसने पानी डालकर आग बुझाई तो पिता की अवशेष हड्डियां राख में पड़ी हुई थी। जिसकी सूचना उसने पुलिस को दी।
उसने बताया कि आम के पेड़ का विवाद पिता से चल रहा था। इसी के चलते बड़े भाई नरेश ने पिता को मारकर सबूत मिटाते के लिए शव जला दिया। पुलिस ने मौके से ही गिरफ्तार कर हत्या कर सबूत मिटाने में रिपोर्ट दर्ज कर नरेश सिंह को जेल भेज दिया था। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। गुरुवार को सुनवाई पूरी हुई। जिसमें दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस, गवाहों के बयान और सबूतों के आधार पर अपर जिला जज प्रथम शिवकुमार ने नरेश सिंह को पिता की हत्या कर सबूत मिटाने के मामले में दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई और तीस हजार रुपये जुर्माना ठोका। जुर्माने की राशि मृतक के पत्नी को दी जाएगी।