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कहीं सिर्फ थर्मल स्क्रीनिंग तो कहीं मास्क तक नहीं

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शहर के कोच बस स्टैंड पर बिना मास्क के बस से उतरते यात्री - फोटो : ORAI
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उरई। कोरोना वायरस के नए स्वरूप ओमिक्रॉन के सामने आने के बाद अब आशंकाएं भी प्रबल हो गई हैं। सरकारी स्तर पर बचाव के प्रयास भी शुरू हैं, लेकिन जिले में किसी भी विभाग में इसे लेकर फिक्र नहीं दिखाई दे रही है।
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सार्वजनिक स्थानों पर बिना मास्क व सामाजिक दूरी के लोगों को चहलपहल करते देखा जा सकता है। अति व्यस्त रेलवे स्टेशन, बस अड्डे पर बेफिक्री साफ दिखाई दे रही है। स्टेशन पर जरूर एक टेबल लगी है, यहां कर्मचारी कुछ यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग करते दिखाई देते हैं, जबकि बस अड्डा तो पूरी तरह से जांच मुक्त दिखाई दे रहा है।
कोरोना की पहली और दूसरी लहर में लगभग 250 से अधिक लोगों की मौत हो गई और करीब 13 हजार लोग संक्रमित हुए थे। उस वक्त तो रेलवे और परिवहन दोनों ही विभागों ने थर्मल स्क्रीनिंग, सैनिटाइजेशन व मास्क पर जोर दिया था, लेकिन अब जिम्मेदार अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
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शुक्रवार दोपहर करीब तीन बजे रेलवे स्टेशन पर एक कोने में बैठे कुछ कर्मचारी आने जाने वाले यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग करते देखे गए। इसके अलावा कोई मास्क लगाए था तो कोई यात्री बिना मास्क के थे।
थर्मल स्क्रीनिंग कर रहे स्वास्थ्य कर्मचारियों ने बताया कि सुबह से अभी तक 30 लोगों की थर्मल स्क्रीनिंग की जा चुकी। जो लोग स्वेच्छा से जांच कराते हैं, उन्हीं की चेकिंग की जा रही है। स्टेशन अधीक्षक एसके खरे ने बताया कि नया वैरिएंट आने के बाद से सतर्कता बढ़ा दी गई है। जांच पड़ताल में सख्ती बरती जाएगी।
उधर, बस अड्डे का हाल देखने से लगता ही नहीं तीसरी लहर का कोई खतरा है। झांसी, कानपुर, औरैया, इटावा जाने वाली बसों में कोई भी यात्री न तो मास्क लगाए था और न ही उनके सामाजिक दूरी दिखाई दे रही थी। यहां से रोजाना चार से पांच हार यात्रियों का आवागमन होता है। परिवहन विभाग के एआरएम केएन चौधरी का कहना है कि शासन की गाइडलाइन मिलते ही सभी बस अड्डों पर कोरोना की रोकथाम के प्रयास शुरू कर दिए जाएंगे।
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