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किसानों के चेहरों पर बजट से मुस्कान

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अशोक सिंह - फोटो : ORAI
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कोंच/सरावन। बुंदेलखंड का किसान पिछले कई वर्षों से दैवी आपदाएं झेलते झेलते बर्बादी के मुहाने पर खड़ा और आत्महत्या करने को मजबूर है। शनिवार को पेश किए गए आम बजट में सरकार ने जिस तरह से खेती किसानी से जुड़े लोगों के लिए अपना पिटारा खोला है, उसे ग्रामीण इलाकों में बजट काफी सराहा जा रहा है। किसानों का मानना है कि जो बजट में दिखाया गया है। अगर उसका क्रियान्वयन जमीनी स्तर पर हो तो इसका लाभ किसान को जरूर मिलेगा। सालों बाद किसी सरकार ने किसानों की इस तरह सुध ली है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति काफी मजबूत होगी।
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पात्रता की शर्त को हटाए सरकार
किसान प्यार मोहम्मद कहते हैं कि बजट से साफ है कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रयासरत है। सरकार ने 11 करोड़ किसानों को फसल बीमा योजना का लाभ देने की जो बात कही है उसमें पात्रता की शर्तं को हटाकर सभी किसानों को इसका लाभ दिया जाए। जिसके तहत सरकार राजस्व विभाग को निर्देश दें कि जो भी किसान हैं वे स्वत: ही बीमा योजना में आच्छादित कर दिए जाए।
फायदेमंद होगी सोलर पंप योजना
पचीपुरा के किसान आत्माराम पटेल बोले कि खेती, मछली पालन पर जोर और कृषि को प्रतिस्पर्धात्मक बनाने जैसी योजनाओं से बुंदेलखंड को विशेष लाभ नहीं होगा। बुंदेलखंड के किसानों के लिए अलग से कोई लाभकारी योजना बनाई जाती तो और बेहतर होता है। कुसुम योजना के तहत 20 लाख किसानों को सोलर पंप दिए जाने की योजना यहां के किसानों के लिए लाभकारी साबित होगी।
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साहूकारों के कर्ज से मिलेगा छुटकारा
महिला किसान शहनाज कहती हैं कि 2020-21 के लिए 15 लाख करोड़ कृषि लोन का लक्ष्य किसानों को साहूकारी कर्ज से काफी हद तक निजात दिलाने में सहायक सिद्ध होगा। अब किसानों को कर्ज चलते अपनी जान नहीं गंवानी पड़ेगी। यह बुंदेलखंड के लिए काफी फायदेमंद वाली योजना साबित होगी। इसके अलावा भी क्षेत्र के कृषि विस्तार को बढ़ावा मिलेगा। अर्से बाद बजट किसानों के चेहरे पर मुस्कराहट लाया है।
योजनाओं का सही खाका खींचा जाए
सरावन के प्रगतिशील किसान अशोक सिंह मंडोरी का कहना है कि किसानों की आय बढ़ाने का प्रयास सराहनीय है पर पशुपालक किसान का भी ध्यान रखना चाहिए था, आज किसानों का दूध और उद्योगपति का पानी दोनों ही 25 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। लिहाजा किसानों की स्थिति सुधारने के लिए सरकार को योजनाओं का सही खाका खींचना होगा। फिलहाल बजट कारपोरेट कल्चर को बढ़ावा देने वाला ही लग रहा है।

्यार मोहम्मद- फोटो : ORAI

आत्माराम पटेल- फोटो : ORAI

शहनाज- फोटो : ORAI

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