भागवत कथा के दौरान बाल लीला करते कलाकार।
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बिना भाव के भगवान कीमती चीजों को भी ग्रहण नहीं करते। यदि भाव से एक फूल ही चढ़ा दें तो प्रभु प्रसन्न हो जाते हैं। जिस व्यक्ति में ईश्वर प्रेम का भाव पैदा हो जाए तो उसे ईश्वर की लगन लगी रहती है। यह बात रविवार को बांकेबिहारी मंदिर जनकल्याण समिति के तत्वावधान में नेहरू बाल मंदिर अंबेडकर चौराहा में कथावाचक पुुरुषोत्तम शरण शास्त्री ने कही।
श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन श्रीकृष्ण जन्म लीला, गोवर्धन पूजा व माखन चोरी लीला की कथा और लीला दिखाई गई। कथावाचक ने श्रीकृष्ण जन्म की कथा विस्तार से सुनाते हुए कहा कि जब श्रीकृष्ण के पैदा होने की खबर राजा कंस को मिली तो वह कारागार में पहुंचा। वहां कन्या को देखकर पत्थर पर पटक कर मारना चाहा तो कन्या हाथ से छूट कर यह कहते हुए
आकाश में चली गई कि तेरा मारने वाला ब्रज में पैदा हो चुका है। इसके बाद वह राक्षसों को ब्रज भेजता है, किंतु वे कृष्ण का कुछ नहीं कर पाते हैं। इसके बाद कंस पूतना को भेजते हैं। इसके बाद श्रीकृष्ण की माखन लीला, गोवर्धन लीला, बाल लीलाओं के दृश्यों का संजीव चित्रण किया गया। गिरिराज महाराज की झांकी के साथ छप्पन भोग लगाया गया। कथा परीक्षित
डा.अखिलेश श्रीवास्तव-कल्पना ने गोवर्धन पूजा कर छप्पन भोग लगाया। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर बधाइयां गाई गई। दिनेश श्रीवास्तव, गौरव चौहान, रामगोविंद, अंजना श्रीवास्तव, रश्मि, मनीष ने प्रसाद का वितरण किया।