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Jalaun News: साहब देर से आते, बाबू भी बेफिक्र

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संवाद न्यूज एजेंसी
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उरई। देर से आना, जल्दी जाना...यह अब विकास भवन की कार्य संस्कृति बन गई है। यहां के अधिकारी समय पर पहुंचने में परहेज करते हैं और इसका असर अधीनस्थ कर्मचारियों पर भी साफ दिखता है। नतीजा यह कि दफ्तर सुबह 10 बजे खुलना चाहिए, लेकिन वास्तविक कामकाज अक्सर 10:30 से 10:40 बजे के बीच ही शुरू होता है।
फरियादी समय पर पहुंचकर इंतजार करते रहते हैं, जबकि अधिकारी और कर्मचारी आराम से बातचीत और गपशप में मशगूल रहते हैं। जो फरियादी जल्दीबाजी दिखाता है, उसे डांट-फटकार भी सुननी पड़ जाती है। संवाद न्यूज एजेंसी की टीम जब विकास भवन पहुंची तो लापरवाही और अव्यवस्था का आलम पहली मंजिल से लेकर आखिरी मंजिल तक फैला दिखा।
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कई दफ्तरों में समय के बाद भी ताले लटके मिले। सफाई कर्मचारी भी 10 बजे के बाद ही पहुंचे, जबकि नियमानुसार नौ बजे तक कार्यालय में साफ-सफाई पूरी हो जानी चाहिए। टीम आठ दफ्तरों में गई, जिनमें ज्यादातर में अधिकारी और कर्मचारी नदारद मिले।
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