समायोजन रद्द करने के फैसले के बाद से शिक्षामित्रों का आक्रोश थम नहीं रहा है। शनिवार को परिषदीय विद्यालयों में शिक्षामित्रों ने विरोध स्वरूप काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य किया। विद्यालय की छुट्टी के बाद शिक्षामित्र बीआरसी पर दो घंटे बैठे और विरोध प्रदर्शन किया।
बीते दिनों हाईकोर्ट ने शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द करने का फैसला सुनाया। इस फैसले के बाद से प्रदेश भर में शिक्षामित्रों ने आंदोलन शुरू कर दिया। जिले में भी धरना प्रदर्शन किया गया व जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु तक की मांग की गई।
उधर, सूबे के मुखिया अखिलेश यादव बराबर आश्वासन देते रहे कि शिक्षामित्र संयम बरतें, सरकार उनके साथ खड़ी है। इसके बाद 18 सितंबर को पीएम नरेंद्र मोदी ने भी वाराणसी की सभा में शिक्षामित्रों से कहा कि वह कोई ऐसा कदम न उठाएं, जिससे उनके परिवार को जीवन भर कष्ट उठाना पढ़े।
इसके बाद प्रदेश भर में सड़कों पर आंदोलन का सिलसिला थम गया। शनिवार को शिक्षामित्रों पठन पाठन की ओर लौट आए। हालांकि इस दौरान भी उन्होंने अपने हाथों में काली पट्टी बांधकर यह दर्शा दिया कि उनका आंदोलन अभी जारी है। स्कूल की छुट्टी के बाद शिक्षामित्र बीआरसी पर दो घंटे बैठे और विरोध प्रदर्शन किया।
उधर, शिक्षामित्र एसोसिएशन के संयोजक दिनेश यादव नेेेे बताया कि भले ही सरकार ने शिक्षामित्रों की समस्या के निराकरण का आश्वासन दिया हो पर जब तक शिक्षामित्रों की पुन: बहाली को लेकर कोई आदेश नहीं आता, शिक्षामित्र काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराते रहेंगे।