फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jalaun News: युवक की हत्या के सबूत मिटाने वाले को सात साल की कैद

विज्ञापन
विज्ञापन
उरई। 19 साल पहले कुसमिलला गांव में हुई हत्या के मामले में सबूत मिटाने पर कोर्ट ने दोषी को सात साल की सजा सुनाई है। साथ ही 20 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। मामले में एक आरोपी को दोषमुक्त किया है।
विज्ञापन


डकोर कोतवाली क्षेत्र के कुसमिलिया गांव निवासी किशोरीलाल ने 20 मार्च 2006 को एसपी को शिकायती पत्र दिया था। इसमें बताया था कि उसका पुत्र शैलेंद्र 15 जनवरी 2006 को गांव के ही भानुप्रताप के यहां टीवी देखने की बात कहकर घर से निकला था। देर रात तक पुत्र के न लौटने पर तलाश की, लेकिन उसका कही पता नहीं चला। उन्होंने डकोर पुलिस को तहरीर दी थी लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की थी। 16 जनवरी 2006 को गांव के वीरसिंह ने उसके भाई कुंदन को जानकारी दी कि उसके भतीजे का शव गांव के बाहर सड़क किनारे पड़ा है।
परिजनों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। एसपी के निर्देश व भानु के पिता की तहरीर पर गांव के ही स्वामीदीन, उनकी पत्नी रामरती व पुत्र श्यामसुंदर के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट की गई थी। पुलिस ने तीनों लोगों को 15 जुलाई 2006 को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पुलिस ने चार अक्तूबर 2006 को कोर्ट में तीनों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। ट्रायल के दौरान स्वामीदीन की मौत हो गई थी जबकि मां-बेटे का ट्रायल चल रहा था। मंगलवार को सुनवाई पूरी हुई। इसमें दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस, गवाहों के बयान और सबूतों के आधार पर विशेष न्यायाधीश डकैती कोर्ट डॉ अवनीश कुमार ने रामरती को दोषमुक्त कर दिया। वहीं श्यामसुंदर को हत्या में सबूत मिटाने के मामले में दोषी पाते हुए सात साल की सजा सुनाई है। 20 हजार रुपये जुर्माना लगाया। जुर्माना अदा न करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें