जालौन। फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी पाने वाले दो शिक्षकों की जांच के बाद विभाग ने सेवा समाप्ति की कार्रवाई कर दी है। मामले की शुरुआत वर्ष 2011 में हुई थी जब जनपद के बेसिक शिक्षा विभाग में तैनात दो शिक्षकों के दिव्यांग प्रमाणपत्रों की जांच कराई गई।
जांच में ब्लॉक कुठौंद में प्राथमिक विद्यालय नवासी में तैनात शिक्षिका चित्रा यादव निवासी शहजादेपुर एवं ब्लॉक महेबा के सिम्हारा कासिमपुर में तैनात शिक्षक आदर्श कुमार तिवारी निवासी राजेंद्रनगर उरई के के प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए। इसके आधार पर विभाग ने वर्ष 2011 में ही दोनों शिक्षकों को सेवा से हटा दिया था। बर्खास्तगी के बाद दोनों शिक्षकों ने न्यायालय की शरण ली लेकिन इसमें दोनों शिक्षकों ने उच्च न्यायालय प्रयागराज में रिट दाखिल नहीं की बल्कि जालौन के स्थान पर जिला लखनऊ दर्शाकर लखनऊ बैंच में रिट दाखिल की गई।
आरोप है कि इस दौरान बीएसए के आदेश के खिलाफ कूटरचित दस्तावेजों के सहारे न्यायालय से स्थगन आदेश का हवाला दिया गया और उन्होंने पुनः नौकरी प्राप्त कर ली और उनका वेतन निर्गत किया जाने लगा। स्थगन आदेश अब तब न्यायालय की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रदर्शित नहीं हो रहा है। इस प्रकरण में अधिकारियों और लिपिकों पर भी आरोप लगे थे। इसकी शिकायत समाजसेवी अशफाक राईन ने बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव से नौ जनवरी 2026 में की थी। इसके बाद इस पूरे प्रकरण की फिर से गहनता से जांच कराई गई।
बीएसए चंद्रप्रकाश ने बताया कि दोनों शिक्षकों को 30 दिसंबर 25 तक पक्ष रखने को कहा गया था लेकिन दोनों शिक्षक पक्ष करने नहीं आए। जांच के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए दोनों शिक्षकों को सेवा समाप्ति की कार्रवाई की गई है। मामले को लेकर बीएसए चंद्रप्रकाश ने बताया कि दोनों शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया गया है।अन्य आरोपों की जांच की जा रही है।