उरई। जिले भर में कानून व्यवस्था को दुरुस्त कराने की जिम्मेदारी निभाने वाला एसपी कार्यालय शनिवार को जंग का अखाड़ा बन गया। पुलिस व भाजपाइयों के बीच जमकर हाथापाई हुई। मामले में दो भाजपाइयों व छह पुलिस कर्मियों को चोटें आई हैं। जिनका डॉक्टरी परीक्षण कराया गया है। भाजपाई थानाध्यक्ष चुर्खी की शिकायत करने एसपी कार्यालय पहुंचे थे और इसी दौरान विवाद होने पर मामला बढ़ गया।
चुर्खी थाना क्षेत्र के बैरई गांव निवासी भाजपा मंडल उपाध्यक्ष सुधीर सिंह ने शुक्रवार को सिरसाकलार थाने में भाजपाइयों के साथ पहुंचकर चुर्खी थाना प्रभारी कमलेश प्रजापति पर अभद्रता करने का आरोप लगाकर तहरीर दी थी। शनिवार को कालपी के पूर्व विधायक नरेंद्र पाल सिंह जादौन के साथ मंडल उपाध्यक्ष सुधीर सिंह एसपी कार्यालय पहुंचे और एसपी से थाना प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने लगे। जिस पर एसपी ने कार्रवाई का आश्वासन दिया।
इसके बाद जैसे ही सभी भाजपाई कार्यालय से बाहर निकले तो एक कार्यकर्ता ने एसपी को अपशब्द कहना शुरू कर दिया। इससे कार्यालय में तैनात सिपाहियों व भाजपा कार्यकर्ताओं में कहासुनी हो गई और इसके बाद दोनों पक्षों के बीच जमकर मारपीट हुई। मारपीट में भाजपा मंडल अध्यक्ष महेवा रिसाल सिंह व भाजपा नेता राममोहन चतुर्वेदी को चोट आई हैं। इसके साथ ही एक उपनिरीक्षक सहित छह पुलिस कर्मियों का भी डॉक्टरी परीक्षण कराया गया है।
दोनों भाजपाइयों को झांसी के लिए रेफर कर दिया गया है। एसपी कार्यालय में हंगामे की जानकारी मिलते ही जिलाध्यक्ष उर्विजा दीक्षित, सदर विधायक गौरीशंकर वर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष कार्यालय पहुंचे और एसपी से बात की। बाहर निकलते ही जिलाध्यक्ष ने एसपी की मौजूदगी में पुलिस कर्मियों पर कार्यकर्ताओं को पीटने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि वह उच्चाधिकारियों से इसकी शिकायत करेंगी।
जिलाध्यक्ष की अगुवाई में डीएम से मिले भाजपाई
उरई। विवाद की सूचना पर जिलाध्यक्ष भाजपाइयों के साथ डीएम कार्यालय पहुंची और उनसे इस पूरे प्रकरण पर एसपी मुलाकात की। इस दौरान भाजपाइयों व पुलिस प्रशासन के बीच सुलह समझौते का माहौल बनाया जाता रहा। खबर लिखे जाने तक मामले में समझौते के प्रयास चल रहे थे।
आश्वासन के बाद भी आपे से बाहर दिखे भाजपा कार्यकर्ता
उरई। भाजपा कार्यकर्ता डीएम से मिले, इसके बाद डीएम ने उन्हें कार्रवाई का आश्वासन दिया। लेकिन भाजपा कार्यकर्ता कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। इस दौरान कुछ जनप्रतिनिधि पूरे प्रकरण से बचते हुए भी नजर आए।