उरई। अंग्रेजी भाषा और इंग्लिश मीडियम स्कूलों के बढ़ते वर्चस्व के बीच जिले में एक ऐसा महाविद्यालय भी है, जो संस्कृत को संजीवनी देने रहा है। यही कारण है कि शहर का आदर्श संस्कृत महाविद्यालय पूरे प्रदेश में मॉडल बना हुआ है। आज भी यहां गुरुकुल परंपरा के अनुसार पढ़ाई होती है। वेद-पुराणों में निपुण यहां के 11 विद्यार्थी प्रदेश के टॉप 25 विद्यार्थियों में शामिल हैं। इन सभी को शासन से नकद पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया गया है।
प्रदेश में बड़ी संख्या में संस्कृत विद्यालय हैं पर शहर के मोहल्ला रामनगर में बना आदर्श संस्कृत विद्यालय प्रदेश में मॉडल है। इस विद्यालय में प्रथमा यानी कक्षा छह से लेकर आचार्य द्वितीय वर्ष यानी एमए फाइनल तक की पढ़ाई होती है। विद्यालय में आज भी गुरुकुल परंपरा चल रही है। संस्कृत बोर्ड की वर्ष 2021 की परीक्षा में इंटरमीडिएट में विकास मिश्रा, अंकित वाजपेयी, शिवपूजन तिवारी को और हाईस्कूल में धर्मज्ञ तिवारी, सुखदेव दीक्षित को एक एक लाख रुपये और टैबलेट दिया गया है। जबकि काशीनाथ त्रिपाठी, अक्षत दुबे, अमरनाथ त्रिपाठी, कुलदीप, शिवम, सौरभ तिवारी को 21-21 हजार रुपये और टैबलेट दिया गया है।
महाविद्यालय की प्रबंध समिति में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह अध्यक्ष हैं तो कालपी से सपा विधायक विनोद चतुर्वेदी प्रबंधक हैं। गल्ला व्यापार समिति के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप माहेश्वरी और अवनीश चंद्र द्विवेदी जैसे प्रतिष्ठित व्यक्ति भी प्रबंध समिति में शामिल हैं। इन सभी ने विद्यार्थियों को बधाई दी है।
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विद्यालय की संयमित जीवन शैली
सुबह चार बजे विद्यार्थी उठते हैं। लगभग डेढ़ घंटे पढ़ाई के बाद साढ़े पांच से छह बजे तक दैनिक क्रियाओं से निवृत्ति होती है। सुबह छह बजे से पूजन-पाठ होता है। आठ से नौ बजे तक व्यक्तिगत कामों के लिए छूट, नौ से साढ़े नौ बजे तक स्वल्पाहार (नाश्ता) का समय होता है। 9:45 बजे प्रार्थना होती है। दस से चार बजे तक विद्यालय में पढ़ाई होती है। इसमें 12: 45 बजे भोजनावकाश भी होता है। शाम चार से पांच बजे तक व्यक्तिगत समय होता है। पांच बजे सामूहिक भोजन होता है। पांच से सात बजे तक संध्या पूजन का काम होता है। साढ़े छह बजे सामूहिक आरती, शाम साढ़े सात से रात दस बजे तक आचार्यों के सानिध्य में बच्चे रहते है। रात दस बजे शयन आदि का काम होता है।
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फोटो-11-डॉ जगप्रसाद चतुर्वेदी।
यहां पढ़ने वाला विद्यार्थी नहीं रहता बेरोजगार
महाविद्यालय के प्राचार्य डा. जगप्रसाद चतुर्वेदी कहते है कि यहां पढ़ाई के साथ संस्कार और अनुशासन भी सिखाया जाता है। यहां पढ़ने वाला विद्यार्थी बेरोजगार नहीं रहता है। वह अपना और अपने परिवार का भरण पोषण कर लेता है।
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फोटो-12-भगवत पटेल।
विद्यार्थी विद्वान और संस्कारवान भी हैं
डीआईओएस भगवत पटेल कहते है कि आदर्श संस्कृत महाविद्यालय पूरे प्रदेश में मॉडल विद्यालय बन गया है। यहां पढ़ाई का स्तर अन्य विद्यालयों के मुकाबले बहुत अच्छा है। विद्यार्थी संस्कारवान है। इसके लिए उन्हें पढ़ाने वाले आचार्य बधाई के पात्र है।
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