फोटो - 29 जानकारी देते रॉनी विश्वास। संवाद
उरई। वह बस की आगे वाली सीट पर अकेले बैठे थे। अचानक तेज आवाज हुई। कुछ समझ पाते, इससे पहले चालक की आवाज आई-जल्दी नीचे उतरो। शहर के चंद्रनगर निवासी रॉनी विश्वास (22) ने किसी तरह खुद को संभाला और महज 30 सेकंड में बस से बाहर निकल आए। कुछ कदम आगे बढ़ने के बाद जब उन्होंने पीछे मुड़कर देखा तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। जिस बस से कुछ पल पहले वह बाहर निकले थे, वह आग की लपटों में घिर चुकी थी। देखते ही देखते पूरी बस धू-धू कर जलने लगी।
नोएडा में हुए स्लीपर बस हादसे में नौ लोगों की मौत की खबर ने रॉनी को अंदर तक झकझोर दिया है। वह खुद उस भयावह रात को अपनी आंखों से देख चुके हैं। रॉनी के मुताबिक, हादसे के समय वह बस की आगे वाली सीट पर अकेले बैठे थे। अचानक तेज आवाज सुनाई दी। इसके बाद चालक ने यात्रियों को जल्दी बाहर निकलने के लिए कहा। रॉनी ने बिना समय गंवाए बस से बाहर निकलने की कोशिश की और करीब 30 सेकंड में नीचे आ गए।
पीछे मुड़कर देखा तो बस आग का गोला बन चुकी थी। रॉनी बताते हैं कि बाहर निकलने के कुछ ही पल बाद उन्होंने पीछे देखा तो आग तेजी से फैल चुकी थी। देखते ही देखते पूरी बस लपटों से घिर गई। यात्रियों की चीख-पुकार और आग का वह मंजर देखकर वह सहम गए।
रातभर सड़क किनारे बैठे रहे
बस से बाहर निकलने के बाद रॉनी ने अपने दोस्तों को फोन कर हादसे की जानकारी दी। इसके बाद वह सड़क किनारे बैठ गए। रात से लेकर सुबह करीब पांच बजे तक वह वहीं मदद का इंतजार करते रहे। हादसे का खौफ इतना था कि वह लगातार उस मंजर को याद कर सहमे हुए थे।
सुबह पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और रॉनी को जेवर टोल प्लाजा तक छोड़ दिया। वहां से वह नोएडा पहुंचे। इसके बाद अगले दिन घर उरई लौट सके। घर पहुंचने पर परिजनों ने उन्हें सुरक्षित देखा तो राहत की सांस ली, लेकिन हादसे में नौ लोगों की मौत की खबर ने परिवार को भी झकझोर दिया।